नागपुर करार पूरी तरह निष्प्रभावी और अन्यायपूर्ण, स्वतंत्र विदर्भ राज्य का निर्माण समय की मांग: विराआंस

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गोंदिया, 29 सितंबर
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति (विराआंस) गोंदिया जिला इकाई की ओर से स्वतंत्र विदर्भ राज्य की मांग को लेकर सोमवार को जिले के सभी आठ तहसील मुख्यालयों पर ‘नागपुर करार होली’ आंदोलन किया गया। आंदोलनकारियों ने 28 सितंबर 1953 को हुए नागपुर करार को विदर्भ की जनता के लिए अन्यायपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल स्वतंत्र विदर्भ राज्य के गठन की मांग की।

जिला मुख्यालय स्थित प्रशासनिक भवन के सामने हुए आंदोलन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष छैलबिहारी अग्रवाल, जिला समन्वयक अतुल सतदेवे, महिला आघाड़ी अध्यक्ष राखी भारद्वाज, उपाध्यक्ष दिलीप गौतम, भोजराज ठाकरे, वसंत गवली, सी.पी. बिसेन, आशीष चौहान और रमेश बिसेन सहित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने किया।

आंदोलन में वरिष्ठ कार्यकर्ता सुंदरलाल लिल्हारे, यशवंत वैद्य, सुरेंद्र नागभीरे, सुनीता भालाधरे, देवकी बघेल, सुधा दुबे, विजया ओझा, जया कुमार, वंदना तुरकर, कुंदा चंद्रिकापूरे और माया जांभुलकर सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जिले के अन्य तहसील मुख्यालयों पर भी आंदोलन किया गया। गोरेगांव में भूपेंद्र पटले, सीमा राऊत, दुर्गाप्रसाद विठूले, नरेंद्र कटरे, बबलू रहांगडाले और गौरी सहारे; आमगांव में विद्या सिंगोडे और पिंकेश शेंडे; सालेकसा में धनजीत सिंह बैस, कृष्णकुमार पटले और युवराज उपराड़े; अर्जुनी मोरगांव में अशोक खोब्रागड़े, खेमराज सूर्यवंशी और मुनिराज बड़मे; देवरी में सदाशिव दियेवार, सुरेश भोंगाडे, मधुकर पुराम, सज्जन मड़ावी, बटिकराव मेश्राम, सत्यवान देशमुख, मनोज बागड़े, जान्हवी मदकाम, ओमप्रकाश शेंडे और राज हुड़; तथा तिरोड़ा में प्रकाश ठोंबरे, चौरेजी, राम संपाल, जनबंधुजी और श्रावण चौधरी, सड़क अर्जुनी से…. सहित कार्यकर्ताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

विकास निधि और रोजगार में पिछड़ेपन का आरोप

विराआंस ने आरोप लगाया कि नागपुर करार में किए गए प्रावधानों का राज्य सरकार द्वारा उचित रूप से पालन नहीं किया गया। समिति के अनुसार, विदर्भ के हिस्से का विकास निधि और रोजगार अन्य क्षेत्रों में चला गया, जिसके कारण क्षेत्र में सिंचाई, सड़क और सरकारी नौकरियों का बड़ा पिछड़ापन निर्माण हुआ है।

समिति ने दावा किया कि विदर्भ में 60 हजार करोड़ रुपये का सिंचाई क्षेत्र का पिछड़ापन, 15 हजार करोड़ रुपये का सड़क विकास का पिछड़ापन तथा 2 लाख 47 हजार सरकारी नौकरियों का बैकलॉग है।

समिति ने विदर्भ में किसानों की आत्महत्या और युवाओं के पलायन का मुद्दा भी उठाया। संगठन के अनुसार, पिछले 21 वर्षों में विदर्भ में 48 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों की तलाश में युवाओं को दूसरे शहरों तथा राज्यों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। समिति का दावा है कि इस पलायन के कारण विदर्भ की जनसंख्या में कमी आई है और क्षेत्र को एक लोकसभा तथा चार विधानसभा सीटों का नुकसान हुआ है।

महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल

आंदोलन के दौरान समिति ने महाराष्ट्र सरकार की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। विराआंस के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार पर 9 लाख 37 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। समिति ने दावा किया कि राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है तथा केवल कर्ज के ब्याज के भुगतान पर भी बड़ी राशि खर्च हो रही है।

समिति के अनुसार, राज्य की राजस्व आय 6 लाख 16 हजार 99 करोड़ रुपये, वार्षिक खर्च 6 लाख 56 हजार 651 करोड़ रुपये, राजस्व घाटा 40 हजार 552 करोड़ रुपये तथा राजकोषीय घाटा 1 लाख 50 हजार 491 करोड़ रुपये है। संगठन ने कर्ज के ब्याज पर 64 हजार 659 करोड़ रुपये, ठेकेदारों की देनदारियों पर 86 हजार 662 करोड़ रुपये तथा किसान कर्जमाफी योजना के 36 हजार 585 करोड़ रुपये के बोझ का भी उल्लेख किया।

विराआंस ने यह भी कहा कि राज्य के 265 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित किए जाने के बाद राहत कार्यों के लिए सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।

विदर्भवादियों ने कहा कि विदर्भ की समस्याओं का स्थायी समाधान अलग राज्य के गठन में है। समिति ने केंद्र सरकार से स्वतंत्र विदर्भ राज्य का तत्काल निर्माण करने की मांग दोहराई।

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