महिला एव्ं विद्यार्थीयों के लेखन- कला कौशल को बढ़ावा देने हेतू “आम्ही सिद्ध लेखिका” और “संविधान मैत्री संघ” द्वारा सालेकसा में जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

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सालेकसा। “आम्ही सिद्ध लेखिका” और “संविधान मैत्री संघ” के संयुक्त तत्वावधान मे महिलाओं और छात्रों के लिए लेखन, कलात्मक, शैक्षिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक, प्रतिभा संवर्धन तथा विभिन्न प्रतियोगिताएं ” उच्च विद्या विभुषीत मान्यवरो का मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन पंचायत समिति सभागृह, सालेकसा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन और राष्ट्रगान की प्रस्तुति से किया गया। अतिथियों का स्वागत संविधान साहित्य की पुस्तिका से किया गया। इस अवसर पर *”सावित्रीमाई तथा महात्मा फुले इन्होने हम सुशिक्षित हो जाये इसलीये जिवन भर संघर्ष किया लेकिन वही क्रांतिज्योति सावित्री-ज्योतिबा को मुट्ठी भर नहीं बल्कि मिट्टी के ढेर में दबा दिया गया। शायद डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और उनके संविधान का जन्म न हुआ होता तो आज हम महिलायें इस स्वतंत्रता के काबिल न होते. संविधान हमें सम्मान का जीवन देता है ” जब यह जागरुकता हर स्त्री में आ जायेगी तब ही विविध क्षेत्र स्तर पर हम सिद्ध होंगे ऐसा प्रतिपादन “आम्ही सिद्ध लेखिका” की उपाध्यक्ष विजया मारोतकर (नागपुर) ने उद्घाटक के रुप में किया.

“आज महिलायें सुशिक्षीत हो रही है, साहित्य क्षेत्र में अपनी किताबें भी प्रकाशित कर रही हैं, विविध क्षेत्र मे खुद को आगे बढ़ाकर खुब नाम कमा रही है, लेकीन यही सुशिक्षीत महिलाये सामाजिक क्षेत्र में दबे कुचले महिलाओ को मुख्यधारा मे लाने की जिम्मेदारी पूरी करने मे पिछड़ जाती हैं. सुशिक्षित होने का प्रमाण देते हुये महिलाओं के अस्तित्व को बचाने के लिए, उनके कला कौशल दुनिया के सामने लाने हेतू हम सविधान मैत्री संघ के साथ सह्योग से जिले में यह जागरूकता उपक्रम चला रहे हैं”* उक्ताशय के विचार आम्ही सिद्ध लेखिका की अध्यक्ष प्रा. डॉ. दिशा गेडाम इन्होने अध्यक्षीय संभाषण में रखे. जानी-मानी लेखिका और कवयित्री उषाकिरण आत्राम ने “मानवतावादी संवैधानिक विचारो को वास्तविक गति देने के लिये अपनी मूल संस्कृति को जानना आवश्यक” इस प्रकार के विचार व्यक्त कर उपस्थीतो का मार्गदर्शन किया।

संस्था के सचिव प्रा. डॉ. कविता राजभोज ने अपने प्रास्ताविक भाषण में संगठन के उद्देश्यों के बारे में बताया। शालू कृपाले ने कुशलतापूर्वक कार्यक्रम का संचालन किया और पुष्पा लिल्हारे ने उपस्थीतजनो का धन्यवाद किया। इस अवसर पर आम्ही सिद्ध लेखिका नागपुर की कोषाध्यक्ष नीता अल्लेवार, वंदना कटरे, संविधान मैत्री संघ के अतुल सतदेवे, आदेश गणवीर, प्रियंका गणवीर, पत्रकार विजय मानकर, प्रा. गणेश भड़ाडे मुख्य रूप से उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम में लेखन- कला गुण- जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए शैक्षीक, सांस्कृतिक एव्ं बौद्धीक विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें “महिला सशक्तिकरण” पर निबंध लेखन प्रतियोगिता, सर्वसामान्य विषयों पर कविता वाचन प्रतियोगिता, बोध कथा कथन प्रतियोगिता, लोक गीत गायन प्रतियोगिता, पारंपरिक एकल और समूह नृत्य प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करनेवाले सफल प्रतियोगीयों में पायल परिहार, सौ.दिपाताई फुंडे, वर्षा रहांगडाले शीतल खानोरकर, विदिशा जांभुळकर, मिनाक्षी टेकाम, कविता पुसाम, मंजुळा मडावी रिता टेकाम,राशी असाटी, तमन्ना बैस, शीतल चौरे, नेहा ठाकूर, स्नेहा मेश्राम, अलिशा चौव्हान , जितेंद्र आसोले, प्रियंका गणवीर, नीता मरसकोल्हे, वैष्णवी शिवणकर, सिया इडपाचे, राशी असाटी, पल्लवी उईके, प्रिया बहेकार, लिसिका बहेकार, भावना मानकर, काजल टेभंरे, गुणवंता सलामे, निकिता बोन्द्रे, वर्षा रहांगडाले, पल्लवी टेकाम, काव्यांजली प्रस्तुत करनेवाले छाया ब्रम्हवंशी, कांचन गोल्लिवार को विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। भाग लेने वाले अन्य प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए.

“आम्ही सिद्ध लेखिका” की कोषाध्यक्ष वंदना कटरे, इंद्रकला बोपचे और किरण मोरे ने इस प्रतियोगिता के परीक्षक के रूप में सहकार्य किया.

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