गोंदिया: चेकपोस्ट पर एक सप्ताह से अटके हैं सैकड़ों ट्रक, चावल उद्योग बंद होने की कगार पर..

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गोंदिया: चेकपोस्ट पर एक सप्ताह से अटके हैं सैकड़ों ट्रक, चावल उद्योग बंद होने की कगार पर..

अच्छा होगा प्रशासन उनकी राइस मिलों को अधिग्रहित कर लें, हम चाबियां देने के लिए तैयार- अशोक अग्रवाल

प्रतिनिधि।
गोंदिया: राज्य के चावल उद्योगों द्वारा अन्य राज्यों से खरीदे जा रहे धान की जिला प्रशासन द्वारा की जा रही जब्ती को राइस मिलर्स एसोसिएशन ने अवैध बताते हुए सरकार से पत्र व्यवहार किया है. एसोसिएशन का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा प्रशासन को दिए गए आदेश का दुरूपयोग हो रहा है. पिछले एक सप्ताह से सैकड़ों ट्रक चेकपोस्ट पर अटके हुए हैं. चावल उद्योग बंद होने के कगार पर हैं. हजारों मजदूरों पर रोजगार का संकट मंडरा रहा है.
   गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पूर्वी विदर्भ के गोंदियाभंडारागढ़चिरोलीचंद्रपुर एवं नागपुर जिले में बहुतायत में धान की फसल होती है. इन जिलों में 700 अत्याधुनिक चावल उद्योग स्थापित हैं. यह उद्योग स्थानीय एवं अन्य राज्यों से धान खरीदी कर उच्च स्तरीय चावल देश एवं विदेश में निर्यात करते हैं.
गोंदियाभंडारागढ़चिरोली जैसे पिछड़े एवं आदिवासी बहुल जिलों में चावल उद्योग ही रोजगार का एकमात्र साधन है. इन्हीं उद्योगों से क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था सुचारू है. राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों की सहायता के लिए एमएसपी पर 700 रूपए बोनस दिया जा रहा है, जो कि स्वागत योग्य है. पड़ोसी राज्य में धान पर बोनस नहीं दिया जाता, इसलिए राज्य सरकार को आशंका है कि पड़ोसी राज्य से धान महाराष्ट्र के खरीदी केंद्रों पर बिक्री हो सकता है. इसे रोकने सरकार ने 15 दिसंबर को आदेश जारी किए हैं. लेकिन इस आदेश का जिला प्रशासन द्वारा दुरूपयोग किया जा रहा है.
   राज्य में एमएसपी-बोनस से धान की दरें अधिक हैं. देश-विदेश के बाजारों में चावल की दरें इनकी तुलना में कम है. इसलिए राज्य के चावल उद्योग अन्य राज्यों से धान खरीदी कर रहे हैं. यह खरीदी पिछले 45 वर्षों से जारी है और इस पर बंदिश भी नहीं है. केंद्र सरकार के किसान उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य अधिनियम 5 जून 2020 के अनुसार, भी कृषि उपज के आवागमन पर देश में कोई बंदिश नहीं है.
    लेकिन पिछले एक सप्ताह से अन्य राज्यों से आए धान के ट्रकों को पुलिस थाने अथवा अन्य स्थानों पर रोककर रखा गया है, यह पूर्णत: अनुचित है. 25-26 दिसंबर को खरीददार राइस मिलर्स से एफिडेविट लेकर ट्रकों को छोड़ा गया. लेकिन फिर से ट्रक रोके जा रहे हैं.
एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सी. अग्रवाल का कहना है कि धान खरीदी की पूर्ण प्रक्रिया आनलाइन है. पहले किसानों के 7/12 रजिस्टर्ड होते हैं. फिर इन्हीं किसानों से धान खरीदी जाता है. भुगतान भी आनलाइन बैंक चेक से होता है. अगर इसमें कोई त्रुटियां हैं तो प्रशासन उसमें सुधार कर सकता है. राइस मिलर्स के धान को नहीं रोका जाना चाहिए. उन्होंने कहा अगर हम गलत है तो, धान की जब्ती कर हम पर कानूनी कार्रवाई करें।
   एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने बताया कि, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद प्रफुल्ल पटेल  सहित संबंधित अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया गया है. प्रशासन सुस्त दिखाई दे रहा है. प्रशासन के इस व्यवहार से क्षेत्र की राइस मिलें बंद हो गई हैं. इन पर अरबों रुपयों का बैंकों का कर्ज है, जो कि बंद उद्योग वापस देने में असमर्थ होंगे. एसोसिएशन का निर्णय है कि इससे अच्छा होगा प्रशासन उनकी राइस मिलों को अधिग्रहित करे. वे चाबियां देने के लिए तैयार हैं.

बाहरी राज्यों से धान की ढुलाई करने वाले वाहनों की जांच हेतु 8 चेकपोस्ट तैयार..

जिला आपूर्ति अधिकारी देवराव वानखेडे ने बताया कि बाहरी राज्यों से धान की ढुलाई करने वाले वाहनों की जांच के लिए पुलिस विभाग एवं उपप्रादेशिक कार्यालय द्वारा 8 चेकपोस्ट तैयार की गई हैं. रावणवाड़ी और देवरी चेकपोस्ट पर पुलिस टीम लगाई गई है. जांच के समय वाहन चालक को सभी आवश्यक कागज, धान खरीदी के बिल, यातायात पास, धान खरीदी वाले फर्म का जीएसटी क्रमांक और टोल नाके की रसीद दिखाना जरूरी है. जांच के पूर्व धान खरीदी के संदर्भ अनापत्ति प्रमाण पत्र आरटीओ और पुलिस विभाग को वाहन चालक द्वारा विवरण पत्र भरकर देना आवश्यक है.

एक सप्ताह से खड़े हैं 350 ट्रक

एसोसिएशन के आग्रह पर जिलाधिकारी कार्यालय में प्रत्येक ट्रक को छुड़ाने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लाने के मौखिक आदेश दिए हैं. जिला आपूर्ति कार्यालय, आरटीओ, पुलिस विभाग के फॉर्मेट राइस मिलर्स को वितरित किए गए हैं. यह किस शासकीय अधिनियम की कौनसी धारा के अंतर्गत आदेश है, इसका कोई उल्लेख नहीं है. अनापत्ति प्रमाणपत्र में प्रति ट्रक एक सप्ताह का समय लगना तय है. इस समय मध्य प्रदेश के रजेगांव से महाराष्ट्र के अंदर आए लगभग 350 ट्रक एक सप्ताह से खड़े हुए हैं. इसी तरह राज्य की विभिन्न चेकपोस्ट पर भी सैकड़ों ट्रक एक सप्ताह से खड़े हैं.

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