‘बैंकर बुक्स एविडेंस बिल’ को राकांपा का समर्थन, सांसद राजेंद्र जैन ने राज्यसभा में गिनाए फायदे

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नई दिल्ली। राज्यसभा में ‘बैंकर बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ पर हुई चर्चा के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से महाराष्ट्र के सांसद राजेंद्र जैन ने विधेयक का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ कानूनों में बदलाव जरूरी है। वर्ष 1881 में बना पुराना कानून आज के डिजिटल भारत और आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा करने में सक्षम नहीं है।

सांसद जैन ने सदन में कहा कि जब 1881 में यह कानून बनाया गया था, तब कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी तकनीकें अस्तित्व में नहीं थीं। आज भारत डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में 221.67 अरब से अधिक खुदरा डिजिटल लेन-देन हुए, जिनमें UPI की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत रही। यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

जैन ने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी होगी। बैंक अधिकारियों को बैंकिंग रिकॉर्ड के संबंध में बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी, जिससे बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ ग्राहकों का भी महत्वपूर्ण समय बचेगा। इस अतिरिक्त समय और संसाधनों का उपयोग मुद्रा लोन, पीएम रोजगार संबंधी योजनाओं तथा कृषि अवसंरचना कोष (AIF) जैसी सरकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने में किया जा सकेगा।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष जोर दिया। सांसद जैन ने कहा कि यह विधेयक केवल बैंक रिकॉर्ड से संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल भारत, पारदर्शी न्याय व्यवस्था और आधुनिक वित्तीय प्रणाली को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अंत में उन्होंने सदन से विधेयक को एकमत से मंजूरी देने का आग्रह करते हुए कहा कि बदलती तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बैंकिंग कानूनों का आधुनिकीकरण समय की आवश्यकता है।

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