नाना पटोले के गढ़ को भेदने, भाजपा ने MLC में रचा “अविनाश” चक्रव्यूह, साकोली जितना भाजपा का लक्ष्य..

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जावेद खान।
गोंदिया। आगामी 18 जून को होने जा रहे भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव में महायुति गठबंधन के तहत भाजपा ने बहुमत के जादुई आंकड़े के आधार पर ये सीट अपनी झोली में डालने में सफलता हासिल कर ली है। जबकि महायुति में प्रफुल्ल पटेल की एनसीपी से इसी सीट से दो बार के विधायक व पटेल के भरोसेमंद साथी व प्रबल दावेदार राजेन्द्र जैन को पोलटिकल गेम के तहत रोक दिया गया है।
महायुति में उम्मीदवार का ये पूरा गेम “साकोली के कांग्रेसी गढ़ को भेदने रचा गया है, जिसमें भंडारा-गोंदिया में अपनी पैठ रखने वाले भाजपा विधायक डॉ. परिणय फुके की भूमिका मुख्य रूप में नजर आ रही है।
दरअसल साकोली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस से विधायक एवं महाराष्ट्र राज्य कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले की भाजपा पर आरोप, प्रत्यारोप व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से जुबानी जंग सर्वविदित है। इसी के चलते वर्ष 2019 में नाना पटोले को परास्त करने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने डॉ. परिणय फुके को भाजपा से साकोली से प्रत्याशी बनाकर नाना पटोले के विरुद्ध मैदान में उतारा था। डॉ. परिणय फुके वर्ष 2016 में भंडारा-गोंदिया विधान परिषद सीट से नागपुर से आकर चुनाव लड़े थे, और प्रफुल पटेल के खास साथी राजेन्द्र जैन को पराजित कर जीत दर्ज की थी। फडणवीस के नजदीकी होने एवं प्रफुल्ल पटेल के भरोसेमंद साथी को पराजित करने पर डॉ. परिणय फुके को गोंदिया और भंडारा जिले का पालकमंत्री बनाया गया, उन्हें राज्य में मंत्री पद दिया गया। इसी दौरान फुके दोनो जिलो में एक चर्चित चेहरा बनकर उभरे और उन्हें 2019 के विधानसभा चुनाव में नाना पटोले को परास्त करने तत्कालीन साकोली विधायक बाला काशिवार की टिकट काटकर साकोली से प्रत्याशी बनाया गया।
नाना पटोले के कांग्रेसी गढ़ को भेदने भाजपा ने वर्ष 2019 में तगड़ी फील्डिंग लगाई, सारे राजनीतिक समीकरण रचे पर भाजपा साकोली के इस किले को भेद पाने पर असफल रही। नतीजतन डॉ. फुके 6 हजार कुछ वोटों से पराजित हुए। फुके ने हार नहीं मानी, इस हार को स्वीकार कर उन्होंने साकोली विधानसभा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि मानकर लाखनी में जनसंपर्क कार्यालय स्थापित किया और क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए 24 घँटे सेवारत रहे।
भंडारा और गोंदिया जिले की कमान संभालने के साथ ही साकोली विधानसभा क्षेत्र में डॉ. फुके के जनकार्य आज चर्चा में बने हुए है। दोनों जिलो में भाजपा की मजबूती को डॉ. फुके की भूमिका के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है।
पांच साल के कार्यकाल समाप्ति पर वर्ष 2024 में पुनः विधानसभा चुनाव आये। इस बार फुके दूसरे कोटे से विधायक बन चुके थे। साकोली से भाजपा उम्मीदवार देना तय था। महायुति के फार्मूले में ये सीट भाजपा के पास ही रहेगी इस जिद्द के साथ डॉ. फुके ने बड़ी दिघोरी से जिला परिषद सदस्य अविनाश ब्राम्हनकर को कांग्रेस के कद्दावर व दिग्गज नेता नाना पटोले के विरुद्ध भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा। इस चुनाव में पूरा साकोली प्रचार का अखाड़ा बन गया। बड़ी बड़ी सभाएं हुई और नतीजे आने पर भाजपा प्रत्याशी जीत का जश्न मनाने लगे। पर ये जीत पोस्टल बेलेट पर लटक गई। नाना पटोले पोस्टल बैलेट के भरोसे पर 208 वोटों से जीत गए।
अविनाश ब्राम्हनकर तभी से दोनों जिलो में चर्चा का विषय बने हुए थे। उन्हें जीता हुआ प्रत्याशी माना जा रहा था। नाना के गढ़ को भेदने वाला अविनाश माना जा रहा था, पर पराजय से भाजपा को दर्द था। ऐसा दर्द जिसका इलाज जरूरी था। अब जब विधान परिषद चुनाव आया तो, भाजपा ने फिर बहुमत के सर्वाधिक आंकड़े दिखाकर इस सीट से दावेदारी की, और नतीजा सबके सामने है।
साकोली में नाना पटोले के गढ़ को भेदने का चक्रव्यूह रचने वाली भाजपा ने फिर अविनाश नामक शस्त्र चला दिया है जो नाना के गढ़ को फिर एकबार चक्रव्यूह रचकर भेदने का प्रयास कर रहे है। इस बार एमएलसी चुनाव में जीत के साथ भाजपा साकोली को पाना चाहती है। आगामी 2029 के विस चुमाव में साकोली भगवामय हो यही भाजपा का प्लान है।
वर्तमान में एमएलसी चुनाव में महायुति के उम्मीदवार अविनाश ब्राम्हनकर के सामने कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार दिलीप बंसोड़ और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रफ़ुल्ल अग्रवाल है। प्रफुल्ल अग्रवाल, 25 साल विधायक रहे एवं जिस समय भाजपा लहर थी, उस 2014 के दौर में कांग्रेस से गोंदिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले गोपालदास अग्रवाल के सुपुत्र है। राजनीति में मंजे हुए अनुभवी नेता के पुत्र होने के साथ ही स्वयं प्रफुल अग्रवाल 2016 के चुनाव में उतरकर राजनीति में उथल पुथल मचाने वाले चाणक्य की भूमिका निभा चुके है। आज प्रफ़ुल्ल अग्रवाल के नामांकन में स्वयं कांग्रेस नेता नाना पटोले की उपस्थिति दर्शाती है कि 18 जून को होने वाला चुनाव बड़ा खेल में होने वाला है।

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