गोंदिया: एमएलसी चुनाव में प्रफ़ुल्ल अग्रवाल का पक्का, निर्विरोध को लगा राजनीतिक धक्का..

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कांग्रेस या निर्दलीय!!, बन रहे राजनीतिक समीकरण

गोंदिया। आगामी 18 जून को होने जा रहे भंडारा-गोंदिया विधान परिषद के चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों में अभी भी संस्पेंस कायम है। गठबंधन के तहत महायुति में इस सीट से भाजपा तो मविआ में कांग्रेस का उम्मीदवार होना, फार्मूले के तहत लगभग तय माना जा रहा है। भले ही भाजपा इस सीट में जीत दर्ज करने जादुई आंकड़ा बता रही है, पर महायुति में सबकुछ ठीक है ऐसा दिखाई नहीं दे रहा।
भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव का समीकरण अब बदल गया है। पहले इसे निर्विरोध रूप में देखा जा रहा था, पर कांग्रेस के मैदान में उतरने के संकेत मिलने के बाद चुनाव में गर्मी आ गई। इतना ही नहीं, यहां महायुति में राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना की नाराजी को देख राजनीति में उलटफेर होने की आशंका भी बनी हुई है।
10 वर्ष पूर्व 2016 में जब एमएलसी चुनाव हुए थे, तब नागपुर के डॉ. परिणय फुके भाजपा के उम्मीदवार थे। राष्ट्रवादी कांग्रेस से प्रफुल्ल पटेल के भरोसेमंद साथी तत्कालीन विधायक राजेन्द्र जैन पुनः मैदान में थे। वहीं कांग्रेस से गोंदिया के तत्कालीन विधायक रहे गोपालदास अग्रवाल के सुपुत्र प्रफुल्ल अग्रवाल भी मैदान में थे। उस चुनाव में मतदाताओं का राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाने से जीत का सेहरा भाजपा उम्मीदवार परिणय फुके के सर बंधा।
वर्तमान में होने जा रहे एमएलसी चुनाव को लेकर महायुति में जो सीट को लेकर रस्सिखेंच चल रहा था, वो अब सीट बंटवारे के फार्मूले के तहत अंततः समाप्त होता दिखाई दे रहा है, परंतु राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजी दिखाई दे रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि, हमनें तन मन और निश्वार्थ भाव से महायुति में भाजपा उम्मीदवारों के लिए दिन रात कार्य किया। अब जब हमारी बारी आयी तो भाजपा पलटी मार रही है। शिवसेना के सुर भी महायुति में अलग अंदाज में नजर आ रहे है।
कांग्रेस ने बदलते इसी समीकरण के तहत अपना उम्मीदवार तय की हुंकार भर दी है। अब कांग्रेस का उम्मीदवार कौन ये भले ही स्पष्ट नही हो पाया है, पर कांग्रेस के पूर्व विधायक गोपालदास अग्रवाल के सुपुत्र प्रफुल्ल अग्रवाल कांग्रेस या फिर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना लड़ना तय मान चुके है। प्रफुल्ल अग्रवाल के पिता, पूर्व विधायक गोपालदास अग्रवाल इस एमएलसी सीट से विधायक रह चुके है। उनके बाद इस सीट से राजेन्द्र जैन दो बार विधायक रहे। इस सीट को लेकर उनका राजनीतिक अनुभव, नेटवर्क मजबूत माना जाता रहा है।

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