गोंदिया | प्रतिनिधि
गोंदिया जिले की प्राकृतिक धरोहर माने जाने वाले सारस पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित ‘सारस मित्र सम्मेलन 2026’ का आयोजन सेवा संस्था द्वारा उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, जलाशयों और कृषि क्षेत्रों के संरक्षण के साथ-साथ सारस पक्षियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सारस संरक्षण को केवल वन विभाग या स्वयंसेवी संस्थाओं का दायित्व न मानते हुए इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
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कार्यक्रम का उद्घाटन महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व पालकमंत्री डॉ. परिणय फुके के हाथों हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पिंपरी चिंचवड़ के नगर आगूक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने की। विशेष अतिथि के रूप में जीईएस की अध्यक्षा वर्षाताई पटेल, क्षेत्र संचालक पियूषा जगताप, जिला पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे, उपवनसंरक्षक पवन जोंग, प्रीतमसिंह कोहड़े, उपसंचालक नवीन नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
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सेवा संस्था के अध्यक्ष सावन बाहेकर ने स्वागत भाषण में संस्था द्वारा वर्षों से किए जा रहे सारस संरक्षण अभियान की जानकारी दी। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से गोंदिया, भंडारा और बालाघाट क्षेत्र में संचालित संरक्षण कार्यों, सामने आ रही चुनौतियों तथा जलाशयों के घटते क्षेत्रफल, कृषि पद्धतियों में बदलाव, रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग और मानवीय हस्तक्षेप से सारस पक्षियों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
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मुख्य वक्ता डॉ. परिणय फुके ने कहा कि सारस पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास—तालाब, नदियां, जलभराव क्षेत्र और धान के खेत—को सुरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संरक्षण कार्यों के दौरान किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी किसान को आर्थिक या कृषि संबंधी नुकसान न हो। उन्होंने सेवा संस्था, सारस मित्रों और किसानों द्वारा किए जा रहे निस्वार्थ कार्यों की सराहना करते हुए शासन, वन विभाग और स्थानीय समाज के समन्वय से इस अभियान को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विजय सूर्यवंशी ने सारस पक्षी को पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि जिस प्रकार बाघ जंगलों के संरक्षण का प्रतीक है, उसी प्रकार सारस पक्षी स्वस्थ जलाशयों और कृषि पारिस्थितिकी का संकेतक है। उन्होंने गोंदिया जिले में सारस आधारित ईको-टूरिज्म विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और संरक्षण अभियान को भी व्यापक जनसहभागिता प्राप्त होगी।
विशिष्ट अतिथि वर्षाताई पटेल ने कहा कि सारस संरक्षण केवल एक पक्षी की सुरक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का अभियान है। उन्होंने किसानों की भागीदारी बढ़ाने तथा पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में गोंदिया और भंडारा जिलों के 35 सारस मित्रों को उनके उत्कृष्ट संरक्षण कार्यों के लिए सारस मित्र किट, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। किट में बैग, मेडिकल बॉक्स, पानी की बोतल, जैकेट, टॉर्च, टी-शर्ट, गमछा, छाता और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थी। साथ ही घाटटेमनी और दासगांव खुर्द गांवों को ‘सारस ग्राम’ सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम में स्थानीय किसानों, स्वयंसेवकों, वन विभाग के अधिकारियों, सेवा संस्था के पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों और पत्रकारों की उपस्थिति रही। आयोजन का संचालन भाग्यश्री सावन बाहेकर एवं राकेश चुटे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन भाग्यश्री सावन बाहेकर ने किया।
सम्मेलन के समापन पर आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि सारस मित्रों, किसानों, प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से सारस संरक्षण अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी तथा भविष्य में इसे और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। बालाघाट जिले में भी शीघ्र ही इसी प्रकार का सारस मित्र सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की गई।
