कम बारिश की आशंका, कृषि विभाग ने जारी की सावधानी संबंधी सलाह
गोंदिया, 16 जून:
इस वर्ष खरीफ सीजन पर एल नीनो का प्रभाव दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार एल नीनो के कारण बारिश अनियमित रहने, बीच-बीच में लंबे अंतराल आने तथा सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती का नियोजन करें।
जल्दबाजी में बुवाई से बचें, पर्याप्त वर्षा के बाद ही करें शुरुआत
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मुख्य फसल की बुवाई करने से पहले कम से कम 75 से 100 मिमी वर्षा होना आवश्यक है। पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही खेत में बुवाई शुरू की जाए। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा पानी की कमी सहन करने वाली फसल किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है। साथ ही अच्छी अंकुरण क्षमता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और रोग प्रतिरोधक बीजों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है।
फसलों में मल्चिंग (आच्छादन) का उपयोग करें ताकि खेत की नमी बनी रहे। खेत के पुराने बांधों की मरम्मत करें तथा “पानी रोको–पानी जमीन में उतारो” जैसे उपाय अपनाकर वर्षा जल का संरक्षण करें। साथ ही जलभराव से नुकसान न हो, इसके लिए निकासी व्यवस्था भी बेहतर रखें।
जोखिम कम करने के लिए अपनाएं अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग)
कृषि विभाग ने किसानों को एक ही फसल पर निर्भर न रहने की सलाह दी है। धान के साथ मेड़ों पर अरहर, तिल, उड़द जैसी फसलों की खेती करने से नुकसान की संभावना कम हो सकती है। अंतरवर्ती खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, रोग एवं कीट नियंत्रण में मदद मिलती है और आय का जोखिम भी कम होता है।
कृषि विभाग की महत्वपूर्ण सलाह
1. बारिश की अनिश्चितता के दौरान रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग न करें।
2. रासायनिक खाद के स्थान पर जैविक खाद, कम्पोस्ट तथा नीम आधारित उत्पादों का उपयोग बढ़ाएं।
3. मौसम परिवर्तन के कारण कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है।
4. किसान नियमित रूप से फसलों का निरीक्षण करते रहें।
5. विशेषज्ञ सलाह के लिए “महाविस्तार एआई ऐप” का उपयोग करें।
6. रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि अधिकारियों से संपर्क करें।
बुवाई से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
– 75 से 100 मिमी वर्षा होने के बाद ही बुवाई करें।
– कम अवधि वाली फसल किस्मों का चयन करें।
– अंतरवर्ती खेती को प्राथमिकता दें।
– धान की खेती में आधुनिक तकनीकों जैसे श्री पद्धति, पट्टा पद्धति, यांत्रिक रोपाई, डीएसआर एवं एसआरटी पद्धति अपनाएं, जिससे मजदूरी और लागत में उल्लेखनीय बचत हो सकती है।
– खेतों के बांध मजबूत करें और जल संरक्षण करें।
– खेत में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं।
– कृषि विभाग की सलाह के अनुसार खेती प्रबंधन करें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाएं
कम वर्षा, अधिक वर्षा, वर्षा में लंबे अंतराल अथवा उत्पादन में कमी जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से सुरक्षा के लिए किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल होने की अपील की गई है। योजना के तहत फसल कटाई प्रयोग एवं उत्पादन आधारित मूल्यांकन के आधार पर पात्र किसानों को नुकसान की भरपाई दी जाती है।
