अनु. जाति उपवर्गीकरण का कड़ा विरोध, संसद में कानून पारित कर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को रद्द करें केंद्र सरकार- पूर्व मंत्री बडोले

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प्रतिनिधि। 25 अप्रैल
गोंदिया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के उपवर्गीकरण के अन्यायकारक आदेश के विरोध में आज पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री एवं वर्तमान विधायक राजकुमार बडोले के नेतृत्व में एक जन आंदोलन गोंदिया के डॉ. बाबासाहब आंबेडकर चौराहे में किया गया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति, बहुजन समाज के लोगो की उपस्थिति रही।
आंदोलन सभा को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने कहा, महाराष्ट्र सरकार राज्य में समाज को अलग अलग हिस्सों में बांटना चाहती है। बदर समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक न कर समाज को संवैधानिक अधिकारों से तोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
पूर्व मंत्री बडोले ने कहा, अनुसूचित जाति का उपवर्गीकरण करने का अधिकार राज्य सरकार को कैसे दिया गया? उन्होंने कहा संविधान की धारा 341 के तहत सभी अनुसूचित जाति वर्ग को आरक्षण का लाभ है। अगर इसमें किसी जाति को समाविष्ट करना है तो इसका अधिकार देश की संसद को है, राष्ट्रपति को है। जाती समाविष्ट करने का अधिकार संसद को है तो उपवर्गीकरण करने का अधिकार राज्य सरकार को कैसे?
बडोले ने कहा, राज्य में संवैधानिक रूप से अनुसूचित जाति का आयोग है। अनेक सांसद और विधायक अनुसूचित जाति वर्ग से है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार एक सदस्यीय समिति अनंत बदर समिति गठित कर उसे अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण का कार्य सौंपती है ये कैसा न्याय है। ऐसी समिति जो रिपोर्ट को सार्वजनिक न करते हुए कुछ दिनों की मोहलत देकर आक्षेप दर्ज करने कहती है। ये सीधे हमारे ही हाथ मे तलवार देकर खुद का सिर कलम करने का फरमान दे रही है।
पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने आगे कहा, डॉ. बाबासाहब आंबेडकर का स्वप्न था कि जो समाज अनेकों वर्षो से अन्याय और अत्याचार में जकड़ा हुआ उसे न्याय दिलाये। उन्होंने शांति का, बहुजनों के हितों का, समता का मार्ग दिखाया। उनका सपना था कि सबको अवसर मिले, समानता और बंधुता का प्रकाश मिले, हजारों वर्षों की बेड़ियां टूटे। एससी, एसएसटी, ओबीसी समाज एकत्रित रहे। पर आज चित्र अलग है। अनुसूचित जाति का उपवर्गीकरण यानी जाती-जाती में विवाद, उनकी शक्ति को तोड़ने का। राज्य में 59 जातियां है अनुसूचित जाति में। कितनी जातियों ने उपवर्गीकरण करने कहा? एक का भी उल्लेख कही नही है। झूठा प्रचार, फेक नैरेटिव फैलाकर जाती का उपवर्गीकरण होना चाहिये, आरक्षण के टुकड़े-टुकड़े होने चाहिये इस प्रकार का प्रयास, षड्यंत्र रचा जा रहा है। भोले भाले लोगो को पता ही नही है, उपवर्गीकरण क्या है, पर सरकार के लोग झूठी जानकारी देकर, भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है। आज हम सभी 59 जातियों को एक और एकत्रित होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, हमनें बदर समिति की रिपोर्ट के विरोध में विधानसभा में आवाज उठायी और इसे रोकने की मांग सरकार से की। वर्ष 1910 में जनगणना हुई, फिर 1931 में हुई। 1931 में अनुसूचित जाति वर्ग तैयार किया गया। ये बाबा साहब आंबेडकर ने तैयार नही किया। सालो से ये समाज वर्ण व्यवस्था से बाहर था। उन्हें गाँव से बाहर रखा जाता था, पढ़ने का अधिकार नहीं था, पीने का पानी नही मिलता था, अधिकारों से वंचित होकर अन्याय सह रहे थे। डॉ. बाबासाहब ने संविधान के कलम 341 के तहत इन सभी को अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण देकर मुख्यधरा में लाने का कार्य किया।
बडोले ने कहा, राज्य में अनुसूचित जाति का कुल आरक्षण 13 प्रतिशत है। अब उपवर्गीकरण मतलब मातंग को इतना, महार को इतना, चर्मकार को इतना और बाकी को इतना। इस प्रक्रिया से राज्य में हमें मूर्ख उपवर्गी करण करने का और हमें आरक्षण से ही नही जाती जाती से लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो गंभीर विषय है।
बडोले ने कहा, 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि अनुसूचित जाति में देश मे जितनी जाती है उनका उपवर्गीकरण किया जाना चाहिये। 2004 में आंध्र प्रदेश सरकार का निर्णय आया था कि, अनुसूचित जाति का उपवर्गी करण नही किया जा सकता। वजह- समाज एक संघ है और इस वर्ग को आरक्षण मिला हुआ है। सभी के सभी अस्पर्श्य थे, इन्हें अलग नही किया जा सकता। इन्हीं कारणों पर आरक्षण दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को जो निर्णय दिया उसके ठीक ढाई महीने बाद 15 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व न्यायमूर्ति अनंत बदर की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित कर दी। बडोले ने कहा समिति में रखने के लिए क्या महाराष्ट्र में 59 जातियों में ऐसा कोई विद्वान नही था? क्या सांसद, विधायक नही थे? क्या आईएएस अधिकारी वर्ग के लोग नही थे। सत्ताधारी या विपक्ष में समाज के लोग नही थे? सरकार को एक ही व्यक्ति मिला अनंत बदर। महाराष्ट्र में पटना न्यायालय के उच्च न्यायाधीश को लाया गया पर राज्य में कोई व्यक्ति न मिलना बड़ी शोकांतिका है।
बडोले ने कहा, वन मेन बदर समिति ने 16 मार्च 2026 को राज्य सरकार को निर्णय दिया और राज्य सरकार ने जीआर निकाला। 10 अप्रैल को जीआर निकालकर कहा गया कि 15 अप्रैल तक यानी 5 दिन में अपने आक्षेप दर्ज करें। ये ऐसे समय कहा गया जब पूरा देश महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती उत्साह हेतु लीन था। जब किसी ने आक्षेप लेने की कोशिश की तो पता चला कि पहले ही सब बुक हो चुका है। यानी तुम न्यायालय जाओगे तो कहा जायेगा कि हमनें तो आक्षेप लेने कहा था, तुमने दर्ज किया नही। ये गंभीर विषय है।
बडोले ने आगे बताया, राज्य में अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण को लेकर जो समिति बनी है उसमे मुख्य सचिव राज्य के मुख्यमंत्री है। सचिव सामाजिक न्याय विभाग से है जो हमारे समाज से है। तीसरे विधि व न्याय विभाग के सचिव है। ये रिपोर्ट क्या है कोई बताने को तैयार नहीं। बदर समिति ने जो अहवाल दिया सरकार ने उसे सार्वजनिक नही किया। कौनसे समाज को कितना दिया पता नही। सरकार कहती है आक्षेप लो, पर आक्षेप कैसे ले ये पता नही। जब रिपोर्ट की सार्वजनिक नही तो आक्षेप कैसा?
बडोले ने कहा- इस बदर समिति ने जाती उपवर्गी करण करते समय कौनसा डेटा एकत्रित किया? ये संविधान के मूलभत रचना का प्रश्न है। रचना करते समय कहा गया है कि इसका वर्गीकरण नही किया जा सकता। संसद ने कानून पारित कर सुप्रीम कोर्ट ने जो अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण का निर्णय दिया है उसे रद्द करना चाहिए ऐसी मांग मैं करता हूँ।

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