श्री दिगंबर जैन समाज गोंदिया में 104 वर्षों में प्रथम बार स्मृति परिवर्तन वर्षायोग – चातुर्मास स्थापना

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प्रतिनिधि। 3 जुलाई

गोंदिया। आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर महाराजजी के परम शिष्य मुनिश्री 108 प्रणीतसागरजी महाराज एवं 108 मुनिश्री निर्मोहसागरजी महाराज का चातुर्मास स्थापना 2 जुलाई 2023 को श्री दिगंबर जैन भवन में हुआ। यह जैन समाज के इतिहास में प्रथम अवसर है जब मुनिद्वय का चतुर्मास का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभु की पालकी लेकर दोनो मुनियो ने एवम समाज बंधुओं ने शोभायात्रा में नगर भ्रमण किया।

अपने द्वार पर समाज बंधुओं ने भगवान की आरती एवं मुनिश्री के पाद प्रक्षालन किये । मंदिर के प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया, इसका सौभाग्य श्री सुरेंद्र फुलचंदजी जैन को प्राप्त हुआ !

संजय जैन ने अपने अध्यक्षीय प्रस्तावना द्वारा 104 वर्षीय जैन मंदिर का इतिहास बताते हुए, 11 वर्षो से चातुर्मास प्राप्ति हेतु सतत प्रयासों से इस वर्ष प्राप्त हुए इस पुण्य अवसर का लाभ सभी से उठाने का निवेदन किया।

विनोदजी जैन ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की!
विविध विधानों के साथ चातुर्मास कलशों की स्थापना श्री जैन भवन में भारी हर्षोल्लास एवम भक्ति के साथ में कि गयी ।

प्रथम श्री विशुद्धसागर कलश लेने का सौभाग्य श्रीमती रत्नीदेवी हीरालालजी पांड्या परिवार, द्वितीय श्री सम्यक दर्शन कलश ज्योति कलश लेने का सौभाग्य श्री रतनलालजी पाटनी दुर्ग निवासी परिवार, तृतीय सम्यकज्ञान कलश लेने का सौभाग्य श्री चक्रेशकुमार नितिन कुमार जैन परिवार एवम चतुर्थ सम्यक चारित्र कलश लेने का सौभाग्य श्री संदीप मनोज कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ ।

समाज के प्रत्येक परिवार को भी मंगल कलश स्थापित करने का पुण्य अवसर प्राप्त हुआ । इस वर्ष अधिक मास होने से 334 दिन चतुर्मास की आराधना श्री दिगंबर जैन भवन गोरेलाल चौक में प्रतिदिन विभिन्न ज्ञानवर्धक क्लास, शिक्षा, भक्ति के द्वारा किया जाएगा।

श्री दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष संजय जैन (लाडली), उपाध्यक्ष बसंत जैन, सचिव हीरेश जैन, कोषाध्यक्ष बसंत जैन, साधु सेवा एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष नवीन जैन, उपाध्यक्ष अतुल जैन, सचिव नितेश बाकलीवाल , कोषाध्यक्ष संदीप जैन के साथ में पूरी साधु सेवा समिति , महिला मंडल एवं समाज के प्रमुख श्रेस्ठी, चातुर्मास के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं ।

गोंदिया नगर वासियों से भी निवेदन किया जा रहा है कि वे भी समय-समय पर गुरुदेव के कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्म लाभ अवश्य ले !

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