गोंदिया: सारस पक्षीयों की घट रही संख्या, तीन साल में 45 से 31 हुए सारस…

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14 सारस पक्षियों में आयी कमी से उठ रहे उनके संरक्षण व संवर्धन पर सवाल..

प्रतिनिधि। 26 जून
गोंदिया। महाराष्ट्र राज्य के इकलौते गोंदिया जिले में पाए जाने वाले सुंदर सारस पक्षियों की गणना में आयी कमी से सारस प्रेमियों में मायूसी छायी हुई है। ये राज्य के लिए गंभीर विषय है कि हम लाख सारस पक्षियों के जतन के दावे करने के बावजूद उन्हें खो रहे है।
हाल ही में 17 जून से 23 जून के दौरान हुई 7 दिवसीय सारस पक्षी गणना में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए है। वर्तमान में गोंदिया जिले में मात्र 31 सारस पक्षियों को पाया गया जबकि भंडारा में 4 सारस पक्षियों की गणना हुई है। महाराष्ट्र के इन दोनों जिलों से अधिक मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में सारस पक्षी संख्या 49 पाई गई। ये गोंदिया जिले के लिए एक दुःखद खबर है।
सारस पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खण्डपीठ ने स्वयं संज्ञान लेकर वनविभाग व जिला प्रशासन को फटकार लगाई थी बावजूद सारस पक्षियों के संवर्धन को लेकर एवं उनकी रक्षा व अधिवास को लेकर कोई उपाय योजना नजर नहीं आ रही, जिससे सारस की संख्या में कमी आयी है।
हाल में हुई सारस पक्षी गणना में पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण तथा संवर्धन पर निरंतर कार्य करने वाली सेवा संस्था ने वनविभाग के साथ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं व किसानों के साथ मिलकर सारस गणना की थी। इसके लिए 39 टीम गोंदिया में बालाघाट में 25 टीम बनाई गई। सुबह 5 बजे से 9 बजे तक अलग अलग टीम सदस्यों ने सारस के अधिवास, बाघ नदी, वैनगंगा नदी तथा तालाबों पर जाकर गणना की।
सेवा संस्था ने कहा, वर्तमान में सारस पक्षियों में आयी कमी को लेकर जिला सारस से अपनी पहचान खो रहा है। हमें अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं, किसानों तथा प्रशासकीय स्तर पर सारस के संवर्धन व संरक्षण को लेकर प्रयत्न करने की जरूरत है।
सारस के गोंदिया जिले में तीन साल के आंकड़े देखे तो, वर्ष 2020 में 45 सारस, वर्ष 2021 में 39, वर्ष 2022 में 34 एवं वर्ष 2023 में 31 सारस पाए गए। तीन साल में जिले में सारस पक्षियों की संख्या बढ़ाने की बजाय कुल 14 सारस पक्षियों को हमनें खो दिया है। ये गंभीर विषय है।

सारस गणना में इनका रहा योगदान

सेवा संस्था अध्यक्ष सावन बहेकार, चेतन जसानी, भरत जसानी, शशांक लाडेकर , अविजित परिहार, कन्हैया उदापुरे, दुस्यंत आकरे दुश्यंत रेभे, पिट् वंजारी, रूचीर देशमुख, बेटी शर्मा, गौरव मटाले, सौरभ घरडे, दानवीर मस्करे, कमलेश कामडे, प्रशांत मेंढे, प्रविण मेंढे, विकास फरकुंडे, डॉ.अनिरूद्ध तांडेकर, बबलू चुटे, मधु डोये, निलू डोये, कैलाश हेमने, राकेश चुटे, जितु देशमुख, प्रशांत लाडेकर,किशोर देशमुख, सोमेश्वर कोलहे, ध्रुव पटेल, वैभव रुपारेल, डिलेश कुसराम, लोकेश भोयर, पप्पु बिसेन, शेरबहादुर कटरे, राहुल भावे, रतिराम क्षीरसागर, शिव भोयर, आशिष गीतम, कासिफ अहमद, वरुन गुरुनानी, वंश माधवनी, पंकज तुरकर, मिलिद रामटेके, चंदन राहंगडाले, चंदूर बहेकार, प्रतिक बहेकार, पूजा मोरघडे, जिगेश्वर लाडे, पराग जीवानी, रजत नागपुरे, सुनील पटले, संतोष हनवते, परमेश्वर पारधी , प्रवीण देशमुख, अमित बेलेकर, शिवोना भोजवानी गोदिया निसर्ग मंडळ के संजय आकरे, अशोक पडोळे, मुकु्द धुर्वे,
दिपक मुंदडा, हिरवळ बहुउद्देशीय संस्था के रुपेश निम्बातें, छतपाल सहारे, गौरव बेलगे, छत्रपाल चौधरी, रोहित
बोरकर, शंकर बनोटे, नवीन चौरागडे , सुभम निपाने सहित वन अधिकारियों का मार्गदर्शन व कर्मचारियों की मौजूदगी रही।

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