गोंदिया: कर रहें हो ऑनलाइन ऑर्डर तो हो जाये सतर्क, मोबाइल पर लिंक भेजकर बैंक खातों से उड़ा रहे रकम…

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क्राइम रिपोर्टर।
गोंदिया। आप अपने मोबाईल से कोई भी वस्तु अगर ऑनलाइन मंगा रहे है तो, थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरत है। क्योंकि कुछ ऑनलाइन लुटेरें आपकी थोड़ी सी गलती का फायदा उठाने तैयार बैठे है।
कुछ दिन पूर्व ही एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन से ऑनलाइन आर्डर कर दवा मंगाई थी। इस ऑनलाइन आर्डर के बाद 26 जनवरी को एक अज्ञात व्यक्ति ने फिर्यादि को फोन कर कहा था कि, वो कस्टमर केयर से बोल रहा है। उसने कहा, जो आर्डर किया गया है वो अभी होल्ड पर है। हमने जो भीम युपीआई लिंक भेजा है उस पर 2 रुपये का ट्रांजेक्शन कीजिये। फिर्यादि द्वारा लिंक पर 2 रुपये ऑनलाइन भेज दिया। अगले दिन 27 जनवरी को फिर्यादि के बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते से दो बार 49 हजार 998 रुपये, ऐसे 99 हजार 996 रुपये अज्ञात व्यक्ति के खाते में रुपये ट्रांसफर होने का मैसेज प्राप्त होकर उसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होने का आभास हुआ।
अब फिर 5 फ़रवरी को इसी तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी होने का मामला गोंदिया ग्रामीण थाने में दूसरी बार दर्ज हुआ। इस ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले पर अबकी बार अज्ञात व्यक्ति द्वारा 44 हजार 172 रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
फिर्यादि की मौखिक रिपोर्ट के अनुसार फिर्यादि को अज्ञात व्यक्ति का फोन आया कि आपका पार्सल हमारे पास आया हुआ है। इसके रजिस्ट्रेशन हेतु आपके मोबाइल पर एक टेस्ट मेसेज लिंक भेजी गई है। उस लिंक को कुरियर बॉय के मोबाइल नंबर फॉरवर्ड कर दो। ऐसा बोलने पर फिर्यादि ने मोबाइल पर आये टेस्ट मेसेज लिंक को कुरियन बॉय के मोबाइल पर फॉरवर्ड कर दिया।
फिर्यादि को शाम 6 बजे के बाद मोबाइल पर बैंक ऑफ इंडिया, शाखा अग्रसेन भवन गोंदिया से मेसेज आया कि फिर्यादि के बैंक खाते से 9 बार कुल रकम 44 हजार 172 रुपये ऑनलाइन निकाले गए। फिर्यादि को आभास हुआ कि उसके साथ ऑनलाइन तऱीके से धोखाधड़ी हुई है।
विशेष है कि आजकल ऑनलाइन ऑर्डर, ट्रांजेक्शन, शॉपिंग आदि पर भी घात लगाकर बैठे लुटेरे ऑनलाइन धोखाधड़ी हेतु तैयार है। हमें ऑनलाइन खरीदी-बिक्री व्यवहार के दौरान सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए, अन्यथा हम भी ऑनलाइन फ़्रॉड के शिकार हो सकते है ये इस धोखाधड़ी के मामले से सिद्ध हो गया है। बहरहाल इस मामले पर फिर्यादि की मौखिक रिपोर्ट पर गोंदिया ग्रामीण थाने में भादवि की धारा 420, सह कलम 66 (सी), सूचना तकनीकी अधिनियम 2008 के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।

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