गोंदिया: मुख्याध्यापिका पत्नी की स्कूल में जाकर निर्मम हत्या करने वाले को उम्रकैद, ढाई साल में आया कोर्ट का फैसला

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प्रतिनिधि। 23 फरवरी
गोंदिया। पेशे से मुख्याध्यापिका रही महिला की उसके ही पति द्वारा पत्नी के चरित्र पर शक कर एवं शराब पीने के लिए पैसे नहीं देने पर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की घटना को अंजाम जुलाई 2019 को स्कूल के भीतर दिया गया था। आरोपी इतना क्रोधित था कि उसने अपने पत्नी पर कुल्हाड़ी से सर, गाल, गर्दन और हाथ पर इतने वार किए की उसकी जगह पर ही मौत हो गई थी।
 इस जघन्य व निर्मम हत्याकांड पर जिला व सत्र न्यायालय गोंदिया के प्रमुख व सत्र न्यायाधीश श्री एस. ए. ए.आर औटी ने दोनों पक्षो की सुनवाई, गवाह, सबूतों के आधार पर अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी मानकर भादवि की धारा 302 के तहत उम्रकैद (मरते दम तक) सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इस मामले पर सरकार की ओर से पैरवी अतिरिक्त सरकारी वकील सतीश यू. घोड़े ने की।
ये प्रकरण 2 जुलाई 2019 को सामने आया था। मृतक महिला प्रतिभा दिलीप डोंगरे गोंदिया तहसील के इर्रि ग्राम में जिला परिषद की प्राथमिक शाला में मुख्याध्यापिका पद पर कार्यरत थी। आरोपी पति दिलीप डोंगरे उम्र 50 वर्ष, अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। जिसके चलते वो उसके तानों को सुनकर उससे त्रस्त होकर अपने बच्चों के साथ अलग रहती थी। आरोपी को शराब के लिए पैसे नही मिलने एवं पत्नी के अलग रहने से वो आगबबूला हो गया तथा मन में क्रोध पालकर वो हत्या का कदम उठा बैठा।
घटना के दिन 2 जुलाई 2019 को सुबह तकरीबन 11 बजे मृतक मुख्याध्यापिका महिला अपने स्कूल में थी। तभी आरोपी ने वहां जाकर कुल्हाड़ी निकाली और पत्नी पर क्रोध में आकर सर पर, गर्दन पर, गाल पर एवं हाथ पर एक के बाद एक सपासप वार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
इस घटना की शिकायत मृतक की बड़ी बेटी दिव्यानि डोंगरे द्वारा गोंदिया ग्रामीण थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसपर तत्कालीन थानेदार मनोहर दाभाड़े ने भादवि की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की। सरकारी वकील श्री घोड़े द्वारा कुल 8 गवाह पेश किए गए।
वैद्यकीय सबूत, न्याय वैधकशास्त्र रासायनिक परीक्षण अहवाल तथा अन्य न्यायालयीन दस्तावेज, कामकाज आदि के आधार पर अहम फैसला आरोपी के विरुद्ध सुनाकर उसे सश्रम आजीवन कारावास, 50 हजार रुपये का दंड सुनाया गया। दंड न भरने पर 3 साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई। न्यायालय ने मृतक के परिवार के पुनर्वसन हेतु विधि व सेवा प्राधिकरण को योग्य  सहयोग करने हेतु आदेशित किया।

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