गोंदिया: डॉ. नीलेश जैन ने दुनिया में 58वें दुर्लभ नेत्र रोग से पीड़ित 12 घण्टे के नवजात बालिका शिशु का किया सफल उपचार..

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प्रतिनिधि।
गोंदिया।
शहर के बी.जे. हॉस्पिटल में विगत दिनों एक बहुत नन्ही मरीज यानी मात्र 12 घंटे की नवजात बालिका शिशु भर्ती हुई थी, जिसकी हालत गंभीर होकर उसे पीलिया था और आंखों की दोनों ऊपरी पलकें पलटी हुई थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जूली ने उसे आईसीयू में एडमिट कर के नेत्र चिकित्सक डॉक्टर नीलेश जैन को सूचित किया।
   ज्ञात हुआ कि मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के एक गांव की एक महिला की प्रसूति बालाघाट के एक हॉस्पिटल में हुई थी। किंतु आंखों की दशा और गंभीरता देखते हुए वहां के डॉक्टरों ने उस बच्ची को तुरंत गोंदिया के लिए रेफर किया था। डॉक्टर नीलेश जैन ने शिशु की जांच की तो समझ में आया कि किसी कारणवश गर्भ में ही बच्चे की आंखों की पलकें पलट गई थी। इसके कारण रक्त प्रवाह ना होने से पलकों में इंफेक्शन और सूजन बहुत बढ़ गई थी।
      डॉक्टरी पेशे में यह एक अजीब तरह का केस था, जिसका ना तो किताबों में उल्लेख था और ना ही अरविंद आई हॉस्पिटल मदुरई और कोयंबतूर की पढ़ाई में ही बताया गया था। डॉ. नीलेश ने अपने प्रोफेसरों और मित्र डॉक्टरों से भी मार्गदर्शन चाहा किंतु सबके लिए ही यह नया केस था। इसका अंतिम विकल्प सर्जरी थी, किंतु इतना छोटा हाल का जन्मा बच्चा जरा भी दर्द सहने के काबिल नहीं रहता है और स्वास बंद होने की आशंका रहती है। यदि इन्फेक्शन इसी तरह बड़ा तो शिशु की आंखों की रोशनी जाने का खतरा था
    अंततः नीलेश जैन ने अपनी सूझबूझ और विवेक से सूजन उतारने की दवा से आंखों की ड्रेसिंग प्रारंभ की। 8 घंटों में भी जब दवा का असर नहीं हुआ तो डॉ. नीलेश जैन ने एक दूसरी दवा का प्रयोग किया। इस दवा का प्रभाव दो दिन में ही नजर आने लगा और सतत ड्रेसिंग से एक हफ्ते बाद आंखें एकदम नॉर्मल हो गई। आंखे नॉर्मल होने से सबका हर्ष का ठिकाना नहीं रहा। बाद में डॉक्टर नीलेश ने अपने हाथों से ही आंखों की पलकों को पलटकर स्वाभाविक दशा में ला दिया।
    इसके बाद इंटरनेट पर सर्च करने से पता चला कि पूरी दुनिया में इस तरह के नेत्र रोग के 57 केस हो चुके हैं और यह गोंदिया में आया 58वां केस था। इस तरह का सबसे पहला केस 1896 में आया था।महाराष्ट्र के नेत्र चिकित्सकों की कॉन्फ्रेंस में इसके बारे में बताया कि उनके लिए ये नया केस था। बिना किसी जानकारी और मार्गदर्शन के सफलतापूर्वक उपचार करने पर डॉ. नीलेश जैन की कान्फ्रेंस के माध्यम से बहुत सराहना की गई।
    दुनिया के इस दुर्लभ केस की जानकारी और दवा अन्य डॉक्टरों को भी पता चल सके इस उद्देश्य से डॉ. नीलेश ने एक लेख बनाकर नेत्र रोगों पर निकलने वाली प्रतिष्ठित पत्रिका इंडियन जर्नल आफ ऑफथोलमोलॉजी में भेजा था। जो इसी अक्टूबर माह के अंक में प्रकाशित हुआ है। इस उपलब्धि पर डॉक्टर नीलेश जैन को उनके डॉक्टर मित्रों और शुभचिंतकों ने बधाई दी है।

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