MOIL की भरवेली खदान में कथित अनियमितताएं, वैध डिलीवरी आर्डर के बावजूद गोंदिया के कारोबारी को बैरंग लौटाया

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अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल, CMD से इस्पात मंत्रालय तक पहुंची शिकायत

प्रतिनिधि।
गोंदिया/भरवेली। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की भरवेली स्थित MOIL लिमिटेड की खदान में मैंगनीज अयस्क के ग्रेड, स्टॉक, डिस्पैच प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। गोंदिया की फर्म श्री बालाजी मिनरल्स के संचालक गंगाराम कारडा और उनके पुत्र अमन कारडा ने मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी फर्म के वैध डिलीवरी ऑर्डर के बावजूद निर्धारित ग्रेड के माल की उपलब्धता और डिस्पैच शेड्यूल को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि जब इस संबंध में जानकारी लेने के लिए खदान पहुंचे, तो उन्हें संबंधित अधिकारियों से मिलने का अवसर नहीं मिला और वापस लौटना पड़ा।
18 से 29 अक्टूबर 2026 के बीच हुए घटनाक्रम और 29 अक्टूबर को केंद्रीय इस्पात मंत्रालय में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद अब यह मामला वरिष्ठ स्तर पर पहुंच गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

105 मीट्रिक टन BGF-534 का ऑर्डर, फिर भी माल की उपलब्धता पर सवाल

शिकायतकर्ता के अनुसार, श्री बालाजी मिनरल्स के नाम 105 मीट्रिक टन BGF-534 बालाघाट फाइन्स मैंगनीज अयस्क का डिलीवरी ऑर्डर जारी किया गया था। संबंधित दस्तावेज में 27 प्रतिशत मैंगनीज ग्रेड तथा N-17 ग्रेड का उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार, ऑर्डर की वैधता 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित थी।
अमन कारडा का आरोप है कि निर्धारित ग्रेड के माल की उपलब्धता और डिस्पैच शेड्यूल की जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार प्रयास करने के बावजूद उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिला। ऑर्डर की समय-सीमा समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष होने के कारण उनकी फर्म के व्यावसायिक हित प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हुई।
शिकायतकर्ता की मांग है कि संबंधित अवधि के स्टॉक रजिस्टर, ग्रेड परीक्षण रिपोर्ट, डिस्पैच निर्देश और वास्तविक लोडिंग रिकॉर्ड की जांच की जाए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि निर्धारित ग्रेड का माल उपलब्ध था या नहीं और उनकी फर्म के ऑर्डर पर क्या कार्रवाई की गई।

डिस्पैच शेड्यूल में श्री बालाजी मिनरल्स का नाम नहीं होने का आरोप

अमन कारडा के अनुसार, 21 अक्टूबर को खदान प्रबंधन से डिस्पैच शेड्यूल के संबंध में बातचीत हुई थी। उनका कहना है कि शेड्यूल उपलब्ध कराने का आश्वासन मिलने के बावजूद 28 अक्टूबर तक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
इसके बाद उन्हें किसी अन्य माध्यम से 19 अक्टूबर 2026 को जारी डिस्पैच शेड्यूल की एक प्रति प्राप्त हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसमें श्री बालाजी मिनरल्स का नाम शामिल नहीं था।
इस घटनाक्रम को लेकर उन्होंने सवाल उठाया है कि जब उनकी फर्म के नाम वैध डिलीवरी ऑर्डर था, तो संबंधित डिस्पैच शेड्यूल में उनका नाम क्यों नहीं था। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अवधि में उपलब्ध स्टॉक, अन्य खरीदारों को जारी किए गए लोडिंग निर्देशों और माल आवंटन की प्रक्रिया की जांच की जाए।
यदि संबंधित ग्रेड का माल उपलब्ध था, तो उसके आवंटन का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि माल उपलब्ध नहीं था, तो स्टॉक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों से इसकी पुष्टि होनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने 18 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच हुए घटनाक्रम को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, BGF-534 ग्रेड के माल की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए थे, जबकि संबंधित लोडिंग और टैक्स इनवॉइस से जुड़े दस्तावेज तथा वीडियो उनके पास होने का दावा किया गया है।
21 अक्टूबर को खदान क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान अलग-अलग स्थानों पर रखे मैंगनीज स्टॉक तथा BGF-534 और BG-4584 ग्रेड से संबंधित सामग्री को लेकर भी सवाल उठने की बात शिकायत में कही गई है।
अमन कारडा का आरोप है कि उनकी फर्म को निर्धारित ग्रेड का माल उपलब्ध कराने में कठिनाई बताई जा रही थी, जबकि दूसरे खरीदारों को बेहतर गुणवत्ता का माल उपलब्ध कराए जाने को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित स्टॉक, ग्रेड परीक्षण रिपोर्ट, लोडिंग रिकॉर्ड और माल आवंटन संबंधी दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित अवधि की CCTV फुटेज, GPS रिकॉर्डिंग, टैक्स इनवॉइस और अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा उनकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

29 अक्टूबर को खदान पहुंचे अमन कारडा को वापस लौटाने का आरोप

मामले में 29 अक्टूबर 2026 को एक और घटनाक्रम सामने आया। अमन कारडा के अनुसार, वह अपने 105 मीट्रिक टन BGF-534 डिलीवरी ऑर्डर और डिस्पैच शेड्यूल के संबंध में जानकारी लेने भरवेली खदान पहुंचे थे।
उनके अनुसार, शाम लगभग 4:42 बजे खदान परिसर में प्रवेश के दौरान सुरक्षाकर्मीयों ने उन्हें रोका और बताया गया कि खदान प्रबंधक विवेक कुमार नागपुर गए हुए हैं।
अमन कारडा का आरोप है कि उन्होंने संबंधित प्रभारी युवराज रथीराम से बात कराने का अनुरोध किया। उनके अनुसार, फोन पर बातचीत के दौरान उनका नाम पूछे जाने के बाद उन्हें वापस भेजने के निर्देश दिए गए और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया। इसके बाद लगभग 4:44 बजे उन्हें खदान परिसर से वापस लौटना पड़ा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह अपनी फर्म के वैध ऑर्डर और डिस्पैच शेड्यूल के संबंध में जानकारी लेने पहुंचे थे। ऐसे में उन्हें संबंधित अधिकारी से मिलने या अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं मिला, इसकी जांच होनी चाहिए।
यदि खदान परिसर में प्रवेश के लिए निर्धारित सुरक्षा नियम लागू थे, तो प्रबंधन को उन नियमों और उनके अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, शिकायतकर्ता को वापस लौटाने के निर्देश किस आधार पर दिए गए, इसकी भी जांच की मांग की गई है।

CMD के समक्ष शिकायत और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय तक पहुंचा मामला

अमन कारडा के अनुसार, मामले को लेकर MOIL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 को उन्होंने केंद्रीय इस्पात मंत्रालय में भी शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल, निर्धारित ग्रेड के माल की उपलब्धता की पुष्टि और वैध डिलीवरी ऑर्डर से जुड़े विवाद का समाधान करने की मांग की है।
उनका कहना है कि मामले को केवल सामान्य कारोबारी विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी अधिकारी ने पद का दुरुपयोग किया है, किसी खरीदार को अनुचित लाभ पहुंचाया है या नियमों के विरुद्ध काम किया है, तो जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
केंद्रीय इस्पात मंत्रालय में शिकायत दर्ज किए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मंत्रालय इस प्रकरण पर क्या संज्ञान लेता है और संबंधित प्रबंधन से क्या जानकारी मांगी जाती है। शिकायत पर आगे की कार्रवाई की स्थिति अभी सामने आनी बाकी है।

कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

MOIL भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। ऐसे संस्थान में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के अनुसार कार्यप्रणाली का विशेष महत्व है।
शिकायतकर्ता ने खदान में कथित भ्रष्टाचार, ग्रेड संबंधी अनियमितताओं और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच की जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
इसलिए उन्होंने मांग की है कि डिलीवरी ऑर्डर, स्टॉक रजिस्टर, ग्रेड परीक्षण रिपोर्ट, डिस्पैच शेड्यूल, लोडिंग रिकॉर्ड, टैक्स इनवॉइस और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी दर्ज किया जाए, ताकि जांच के निष्कर्ष तथ्यात्मक आधार पर सामने आएं।
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

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