गोंदिया | प्रतिनिधि
शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों में शामिल ‘करियर जोन’ पर बुधवार सुबह वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग की टीम ने छापेमार कार्रवाई की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कोचिंग फीस पर लागू 18 प्रतिशत GST की वसूली के बावजूद उसे शासन के खाते में जमा नहीं किए जाने की शिकायत के आधार पर नागपुर से पहुंचे अधिकारियों ने गोंदिया स्थित संस्थान में जांच शुरू की।
कार्रवाई के दौरान विभागीय अधिकारियों ने संस्थान के कार्यालय में प्रवेश कर फीस रजिस्टर, जीएसटी रिटर्न, बिल, कंप्यूटर रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की। जांच के समय विद्यार्थियों को कुछ समय के लिए कक्षाओं से बाहर रखा गया, जबकि टीम ने संस्थान के कर्मचारियों से भी पूछताछ की।
छात्रों को राहत, दोबारा टैक्स नहीं देना होगा
जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्र ने कोचिंग फीस के साथ पहले ही 18 प्रतिशत GST का भुगतान किया है और उसके पास वैध रसीद उपलब्ध है, तो उससे दोबारा कोई कर नहीं वसूला जाएगा। विभाग की कार्रवाई संस्थान की कर देयता की जांच के लिए है, न कि विद्यार्थियों से अतिरिक्त राशि लेने के लिए।
रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
सूत्रों के अनुसार, विभाग पिछले दो से तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और आय-व्यय से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। यदि जांच में कर चोरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग अथवा नकद लेन-देन में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत जुर्माना एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
कोचिंग संस्थानों पर विभाग की नजर
जानकारी के अनुसार, जिले में संचालित कई निजी कोचिंग संस्थानों की कर व्यवस्था को लेकर भी विभाग निगरानी रखे हुए है। शिकायत है कि कुछ संस्थान विद्यार्थियों से जीएसटी सहित फीस तो वसूलते हैं, लेकिन निर्धारित समय पर कर जमा नहीं करते। ऐसे मामलों में विभाग क्रमबद्ध तरीके से रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
GST नियम क्या कहते हैं?
जीएसटी अधिनियम के अनुसार, स्कूली शिक्षा (स्कूल स्तर तक) को कर से छूट प्राप्त है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, निजी ट्यूशन, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य वाणिज्यिक कोचिंग सेवाएं निर्धारित शर्तों के अनुसार 18 प्रतिशत GST के दायरे में आती हैं। यदि कोई संस्थान विद्यार्थियों से कर वसूलने के बाद उसे सरकारी खाते में जमा नहीं करता, तो इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाता है।
जांच जारी..
जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच की जा रही है। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही वास्तविक कर देयता और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
