गोंदिया : फर्जी दस्तावेज के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनाकर चुनाव जीतने वाले सरपंच पर हो कार्रवाई..

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पत्र परिषद में बिरसी वासियों की मांग..

 

प्रतिनिधि।
गोंदिया-(ता.16) बिरसी (कामठा) के वर्तमान सरपंच द्वारा फर्जी दस्तावेज जमा कर जाति प्रमाण पत्र बनवाकर अनुसूचित जमाती की सीट से सरपंच पद का चुनाव जीतने वाले संतोष प्रकाश सोनवणे पर कानूनी कार्रवाई कर जाति प्रमाण पत्र रद्द कर उसके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई कीये जाने की मांग ग्राम पंचायत बिरसी के नागरिकों ने आज गुरुवार (16) को आयोजित पत्रपरिषद के माध्यम से की है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2022 माह में हुए ग्राम पंचायत आम चुनाव में बिरसी (का.) में सरपंच का पद अनुसूचित जमाती के लिए आरक्षित था. इस सीट पर संतोष प्रकाश सोनवणे निर्वाचित हुए थे.
पत्र परिषद में आरोप लगाया गया कि, संतोष सोनवणे के पास इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं था कि उनके दादा और परदादा अनुसूचित जमाती के थे, लेकिन उन्होंने अपने झूठे दस्तावेज जमा कर अनुसूचित जमाती जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
उनके द्वारा जाति प्रमाण पत्र के लिए दाखिल दस्तावेज के मुताबिक उनके दादा मनीराम का जन्म 1917 में और उनके परदादा चिंतामन का जन्म 1936 में हुआ था. तो गांव वालों ने सवाल उठाया है कि क्या बाप से पहले बेटा पैदा हुआ था?
साथ ही ग्रामीणों ने पत्र परिषद में यह भी आरोप लगाया है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि उक्त संतोष सोनवणे ने सरकारी कर्मचारियों से साँठगाँठ कर फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की, क्योंकि दर्ज असली दस्तावेज में बड़ा अंतर है. उक्त जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम अंतर्गत सरकारी दफ्तर से निकाली गई पुख्ता जानकारी से स्पस्ट दिखाई दे रही है।
इसमें उनके दादा के मृत्यु प्रमाण पत्र में भी गड़बड़ी है और एक ही दिन में दो मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने का चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. गौरतलब है कि उक्त व्यक्ति ने पूर्व में भी जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था लेकिन पुख्ता सबूत नहीं होने के कारण उपविभागीय अधिकारी गोंदिया ने उसका आवेदन निरस्त कर दिया था. हालांकि, ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए झूठे दस्तावेज प्रस्तुत किए और जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
मामले की शिकायत एसडीओ गोंदिया को सभी साक्ष्यों के साथ की गई, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एसडीओ कार्यालय ने मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों ने कहा, चूंकि उक्त सरपंच मौजूदा विधायक दल का होने से शायद इस मामले पर कोई राजनीतिक दबाव तो नहीं है? ऐसा आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।
संतोष सोनवणे वर्तमान में बिरसी के सरपंच हैं और ग्रामीणों का आरोप है कि वह अपनी स्थिति बचाने के लिए ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में अपने परदादा दीना का नाम चिंतामन के रूप में गलत साबित कर साक्ष्य जुटा सकता है। उक्त संतोष सोनवणे गैर आदिवासी हैं और अनुसूचित जमाती के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़कर वास्तविक अनुसूचित जमाती के साथ अन्याय है तथा इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर उक्त सोनवणे का जाति प्रमाण पत्र तत्काल निरस्त कर उनके विरुद्ध अनुसूचित जाति जमाती प्रतिबंधक अधिनियम के अनुसार कार्यवाही की जाये अन्यथा बिरसी का आदिवासी समुदाय सड़कों पर उतरेगा, ये चेतावनी भी पत्र परिषद में दी गई है.
पत्र परिषद में मुख्य रूप से पूर्व सरपंच रवींद्र तावाड़े, पूर्व उप सरपंच सुरेशचंद्र पंधरे, रंजीतसिंह पंडेले, नीलकंठ हत्तीमारे, पंकज वंजारी आदि मौजूद रहे।

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