गोंदिया: बोगस डॉक्टर लंकेश मेश्राम को 29 साल की कठोर सजा, नाबालिग पीड़िता से इलाज के बहाने बेहोशी की दवा खिलाकर कर रहा था दरिंदगी

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विशेष पॉक्सो कोर्ट का आज आया ऐतिहासिक फैसला, ऐसे ढोंगी व बोगस डॉक्टरों से सावधान रहने की अपील..

रिपोर्टर। 10 मई
गोंदिया। जिला न्यायालय के विशेष सत्र न्यायालय द्वारा आज घिनोने दुष्कर्म के मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। विशेष सत्र न्यायाधीश मा. एस.ए.ए.आर औटी ने ढोंगी व बोगस डॉक्टर के रूप में अशिक्षित लोगों का फायदा उठाकर नाबालिग पीड़िता के इलाज के बहाने बार-बार दरिंदगी करने के आरोप में दोषी मानते हुए आरोपी मुकेश उर्फ लंकेश मेश्राम (35) निवासी फुलचुर/गोंदिया को भादवि की धारा 376(2)(एन), 343, 328, 506 व पॉक्सो एक्ट की धारा 4, 6 अंतर्गत 29 साल की सश्रम कठोर सजा व 1 लाख 14 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई।
इस मामले पर सरकार की ओर से आरोपी पर आरोप सिद्ध करने अतिरिक्त सरकारी वकील सतीश यू घोडे, विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी पारधी ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने आरोपी के विरुद्ध कुल 8 गवाह, सबूत प्रस्तुत किये।
ये था प्रकरण:- फिर्यादि/पीड़ित 17 वर्षीय लड़की को छाती के पास गांठ आ गई थी। इस गांठ के दर्द के चलते उसने अनेक जगह इलाज कराया, पर दर्द व गांठ से राहत नही मिली। इस दर्द के चलते उसकी तबियत खराब रहने लगी। इस हालत को देख पीड़िता की दादी जिस जगह काम पर जाती थी उसने लंकेश मेश्राम की जानकारी दी और उसकी दवा से आराम मिलेगा ऐसा कहा। दादी को आरोपी की जानकारी मिलने पर 27 मार्च 2019 को दादी, पीड़िता व पीड़िता की माँ आरोपी लंकेश मेश्राम के घर गए। तबियत ठीक न होने पर पीड़िता पलंग पर लेट गई। इसी दौरान इस ढोंगी बोगस डॉक्टर ने पीड़िता के सोने का फायदा उठाकर उसके साथ अश्लील हरकतें की।
आरोपी लंकेश ने घर के लोगो को उस कमरे से बाहर कर पीड़िता को काले रंग की बेहोशी की दवा खिलाई व कमरे का दरवाजा बंद कर 27 मार्च 2019 से 5 अप्रैल 2019 तक अनेक बार पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर इज्जत को तार-तार किया। इतना ही नहीं ये ढोंगी परिवार के लोगो को भी बेहोशी की दवा देता था। पीड़िता को व परिवार को बेहोश करने पर वो किसी को कुछ नही बता पा रही थी।
5 अप्रैल 2019 को पीड़िता के रिश्ते में काका उसके घर आए। घर के दरवाजे में ताला लगा देखकर उन्होंने पड़ोस के लोगो से पूछताछ की। पता चला कि घर में ताला करीब 8 दिन से लगा है। सब हाथ-पैर मारने के बाद जब पीड़िता के चाचा ने घर के दरवाजे का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया तो आरोपी घर के भीतर मिला। उसे प्रतीत हुआ कि आरोपी दरवाजा बंद कर भीतर 8 दिन से बेहोशी की दवा देकर कैसा ईलाज व उपचार कर रहा है। उसे संदेह होने पर उसने गोंदिया शहर पुलिस को फोन पर सूचना देकर घटना स्थल पर बुलाया। पीड़िता का उपचार होने के बाद ये बात सामने आयी कि आरोपी ने पीड़िता को बेहोशी की दवा देकर उसके साथ अनेक बार दुष्कर्म किया।
पीड़िता द्वारा शहर थाने में आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शिकायत आने पर तत्कालीन महिला पुलिस उपनि संदिया सोमनकर ने धारा 376(2)(एन) 342, 343,328, 506 व पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 4, 6 अंतर्गत मामला दर्ज कर व संपूर्ण जांच कर कोर्ट में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अतिरिक्त सरकारी वकील सतीश यू. घोडे ने कहा कि आरोपी लंकेश मेश्राम पर इस अपराध के पूर्व भी छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म का मामला दर्ज है। इस घटना से ये बात स्पस्ट है कि आरोपी यौन शोषण का गलत तरीके एवं तांत्रिक व ढोंगी डॉक्टरी पेशे का दुरुपयोग कर बेहोशी की दवा देकर दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। न्यायालय द्वारा जो ऐतिहासिक फैसला इस मामले में सुनाया गया है वो ऐसे ढोंगी व पाखण्डी बोगस डॉक्टरों के लिए सबक है। समाज ने इन लोगो से सावधान रहना चाहिए।
मा. न्यायालय ने सरकारी वकील व आरोपी के वकील के बीच हुई जिरह, युक्तिवाद आदि की सुनवाई के पश्चात एवं सरकारी पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाह, सबूत, डॉक्टरी रिपोर्ट, रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट एवं प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को ग्राहय मानते हुए आरोपी मुकेश उर्फ लंकेश मेश्राम को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 अन्तर्गत 20 साल सश्रम कारावास व 1 लाख दंड की सजा सुनाई। दंड न भरने पर 5 साल अतिरिक्त सजा सुनाई। भादवि की धारा 328 अंतर्गत 5 साल सश्रम कारावास, 10 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई। दंड न भरने पर 1 साल अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई । इसके साथ ही भादवि 506 अंतर्गत 2 साल की सश्रम सजा व 2 हजार दंड। दंड न भरने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा। भादवि 343 के तहत 2 साल की सश्रम सजा व 2 हजार रु दंड। दंड न भरने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा। ऐसा कुल 29 साल सश्रम कठोर कारावास व 1 लाख 14 हजार दंड की सजा सुनाई।
कोर्ट ने दंड की रकम 1,14000 रू पीड़िता को देने के आदेश दिए। मनोधर्य योजना अंतर्गत पीड़िता के स्वास्थ्य जांच व उपचार एवं पुनर्वसन के लिये जिला विधि सेवा प्राधिकरण को योग्य सहायता करने हेतु आदेशित किया।
इस प्रकरण में पैरवी कर्मचारी के रुप में महिला पुलिस हवलदार श्रीमती पटले व पुलिस सिपाही रामलाल किरसान पुलिस स्टेशन गोंदिया शहर ने कामकाज संभाला

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