गोंदिया: चाचा की 10 साल की भतीजी के साथ दरिंदगी, कोर्ट ने सुनाई 15 साल की कठोर सजा

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3 साल बाद मिला पीड़िता को न्याय, माता-पिता की मृत्यु होने पर रहती है दादा के पास..

गोंदिया। 28 अप्रैल
6 सितंबर 2017 को चाचा-भतीजी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली घटी दरिंदगी की एक घटना पर आज 28 अप्रैल 2022 को जिला न्यायालय की  विशेष अदालत ने यौन शोषण के मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को 15 साल की कठोर सजा व 20 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई। ये फैसला 3 साल पर आने पर पीड़िता को अब जाकर न्याय मिला। दंड की रकम पीड़िता को देने हेतु कोर्ट ने आदेश दिए है।
इस मामले पर सरकार तर्फे व पीड़ित/फिर्यादि तर्फे विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी. पारधी व विशेष सरकारी वकील वसंत एम चुटे ने कुल 11 गवाह कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किये।
जिला न्यायाधीश-2 तथा  विशेष सत्र न्यायाधीश गोंदिया मा. ए. एम. खान ने इस मामले पर आरोपी की उम्र, स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट, कोर्ट में प्रस्तुत सबूत व दोनों पक्षों के बीच हुए युक्तिवाद पर अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी को पाक्सो कानून-2012 के तहत दोषी मानते हुए भादवि की धारा 376 (2),(एफ) 15 साल की कठोर सजा व 10 हजार दंड, 376(2) (आय), अंतर्गत 15 साल कठोर सजा व 10 हजार रुपये दंड, धारा 506 अंतर्गत 6 माह की सजा ऐसा कुल 30 साल 6 माह की सजा व 20 हजार दंड की सजा सुनाई।

ये है प्रकरण: 6 सितंबर 2017 को रात 11 बजे के दौरान पीड़ित बच्ची (उम्र 10 साल) ये घर के सामने छपरी पर अकेली सो रही थीं। तभी उसका चाचा पीड़ित के पास आया और उसके साथ यौन शोषण किया। आरोपी ने पीड़िता को धमकाया की अगर किसी को बताया तो वो उसे जान से मार देगा। पर पीड़िता डरी नहीं, उसने जब अगले दिन सुबह उसके दादा आये तो उसने सारी घटना उनके सामने रख दी।

विशेष है कि पीड़िता के माता-पिता की मृत्यु हो गई है, और वो अपने दादा के पास रहती है। दादा ने बच्ची को न्याय दिलाने अपने बेटे के खिलाफ कठोर कदम उठाएं और अगले ही दिन 7 सितम्बर को गोंदिया ग्रामीण थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के विरुद्ध धारा 376 (2),(एफ)(आय), 506 भादवि व कलम 4,6 बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत अपराध दर्ज कर पूरे मामले की जांच कर तत्कालीन जांच अधिकारी PI दिनेशचन्द्र शुक्ला गोंदिया ग्रामीण थाना ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की।
मा. कोर्ट ने जिला विधि सेवा प्राधिकरण गोंदिया मार्फत पीड़ित बच्ची को मनोधर्य योजना अंतर्गत आर्थिक मदद व पुनर्वसन करने के आदेश दिए। इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस विभाग से गोंदिया ग्रामीण थाने के पुलिस निरीक्षक बाबासाहब गोडसे के देखरेख में पैरवी कर्मचारी के रूप पुउपनि आत्माराम टेंभरे ने उत्कृष्ट कार्य किया।

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