गोंदिया: 8 साल की मासूम से दरिंदगी, कोर्ट ने सुनाई 20 साल की कठोर सजा..

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अक्टूबर 2020 में अर्जुनी मोरगाँव थाना क्षेत्र में हुई थी इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना…आज आया महत्वपूर्ण फैसला

क्राइम रिपोर्टर। 04 मार्च
गोंदिया। एक 8 साल की नन्ही बच्ची से दरिंदगी करने की घटना वर्ष 2029 में अर्जुनी मोरगाँव थाने में घटित हुई थी। इस मामले पर कोर्ट के विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आज 4 मार्च को बाल यौन शोषण के मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की कठोर सजा सुनाई वहीं 2 लाख रुपयो का दंड ठोका है।

गोंदिया जिला विशेष सत्र न्यायालय के प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश श्री एस.ए.ए.आर. औटी ने इस मामले पर आरोपी रूपेश विजय मडावी उम्र 22 वर्ष निवासी अर्जुनी मोरगाँव को पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का सरंक्षण) अधिनियम 2012 अंतर्गत सभी सबूतो, गवाहों, स्वास्थ्य व डीएनए रिपोर्ट व कोर्ट में चली दोनो पक्षों के वकीलों के युक्तिवाद में अंतिम सुनवाई कर आरोपी को दोषी ठहराया एवं 20 साल की सश्रम सजा के साथ ही 2 लाख रुपये का दंड भी ठोका।

इस मामले में सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी. पारधी व अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता सतीश यू. घोडे ने पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कुल 8 गवाहदार प्रस्तुत किये।

ये था प्रकरण..
सभ्य समाज में इंसानियत को कलंकित करने वाली ये घटना 26 अक्टूबर 2020 को दोपहर 1 बजे आरोपी के घर पर घटी। आरोपी रूपेश ने फिर्यादि की 8 साल 8 माह की मासूम बेटी को खेलते वक्त अपने पास बुलाया और चॉकलेट लाने 1 रुपये दिए। जब बच्ची आयी तो उसे घर पर ले जाकर उसे निवस्त्र किये और उसके साथ दरिंदगी की। मासूम के रोने पर जब मां ने उससे पूछा तो, उसने सारी हक़ीक़त बयान की।

तब इस मामले पर बच्ची को न्याय व ऐसी घटना दोबारा न हो इसे लेकर अर्जुनी मोरगाँव थाने में उसकी मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई। तत्कालीन जांच अधिकारी एपीआई पीडी भूते, पुलिस उपनिरीक्षक अशोक अवचार ने भादवि की धारा 376 (अ ब ज) व धारा 4,6,12 यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण, पॉक्सो अंतर्गत आरोपी विरुद्ध शिकायत दर्ज कर व सम्पूर्ण जांच कर कोर्ट के समक्ष चार्जशीट प्रस्तुत की।

इस मामले पर मा. न्यायालय ने दंड की रकम 2 लाख रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया। दंड रकम न भरने पर 5 साल की अतिरिक्त सजा आरोपी को सुनाई। इसके अलावा मनोधैर्य योजना अंतर्गत पीड़ित बच्ची के स्वास्थ्य जांच व पुनर्वसन के लिए जिला विधि सेवा प्राधिकरण को योग्य सहायता करने के निर्देश दिए।

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