गोंदिया: 11 साल की बच्ची से हैवानियत, कोर्ट ने सुनाई 20 साल की कठोर सजा..

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16 माह के भीतर आया जिला न्यायालय का फैसला, तिरोडा में घटी थी हैवानियत को शर्मसार करने वाली घटना

प्रतिनिधि। 28 फरवरी
गोंदिया। जिला कोर्ट के विशेष सत्र न्यायालय द्वारा आ रहे धड़ाधड़ फैसलों से समाज में कानून व्यवस्था व न्याय प्रक्रिया को लेकर बेहतर संदेश जा रहा है। आज 28 फ़रवरी को फिर एक दुष्कर्म के मामले की सुनवाई में कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की कठोर सजा सुनाई वहीं 2 लाख रुपयो का दंड ठोका है।
आज गोंदिया जिला न्यायालय के विशेष सत्र न्यायाधीश श्री एस.ए.ए.आर. औटी ने 15 अक्टूबर 2020 को हुए तिरोडा क्षेत्र में आरोपी अक्षय वैद्य उम्र 22 वर्ष को सभी सबूतो, गवाहों व कोर्ट में चली दोनो पक्षों के वकीलों के युक्तिवाद में अंतिम सुनवाई कर आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की सश्रम सजा व 2 लाख रुपये दंड की सजा सुनाई।
इस मामले में सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी पारधी ने पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कुल 8 गवाहदार प्रस्तुत किये।

ये था प्रकरण..16 माह में आया फैसला

 हैवानियत को शर्मसार करने वाली घटना तिरोडा थाना अंतर्गत 15 अक्टूबर 2020 को घटी। घटना वाले दिन सुबह फिर्यादि की काके सास की मौत हो गई थी। वो अपने काकेसास की मैय्यत से दोपहर को वापस घर लौटी। घर लौटने के बाद फिर्यादि ने पीड़ित बच्ची को फेयर एंड लवली लेने पास की दुकान भेजा था। जब पीड़ित बच्ची काफी देर तक वापस नही आई, तब फिर्यादि उसे देखने आरोपी की दुकान गई, पर इसका शटर बंद था। फिर्यादि आगे की दूसरी दुकान गई, पर वहां पीड़िता नही आई ऐसा जवाब मिला।
जब फिर्यादि वापस घर आ रही थीं, तब आरोपी की दुकान से रोते हुए पीड़ित बच्ची आते दिखाई दी। उसने सारी कहानी फिर्यादि को बताई।
 घटना के दिन आरोपी अक्षय वैद्य ने अकेला का फायदा उठाकर पीड़िता को नड्डा व तिरंजी खाने दिया और उसके साथ लैंगिक अत्याचार किया। पीड़ित की माँ ने अपनी मासूम बेटी को न्याय दिलाने आरोपी के विरुद्ध तिरोडा थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर धारा 376(3), 376(ए बी) भादवी व धारा 4,6 बाल यौन शोषण से संरक्षण अधिनियम 2012 अंतर्गत अपराध दर्ज किया।
इस मामले में कोर्ट ने दंड की रकम 2 लाख रुपये न भरने पर 5 साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई। ये रकम पीड़िता को देने के आदेश दिए वही मनोधैर्य योजना अंतर्गत पीड़िता के वैद्यकीय उपचार व पुनर्वसन हेतु जिला विधि सेवा प्राधिकरण को योग्य सहायता करने के निर्देश दिए।
इस प्रकरण में पुलिस निरीक्षक तिरोडा थाना योगेश पारधी के मार्गदर्शन में पैरवी अधिकारी मपुशि सुनीता लिल्हारे व पोहवा शंकर साठवने ने उत्कृष्ट कार्य किया।

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