गोंदिया: 6 साल बाद आया फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला, आरोपी को सुनाई गई 10 साल सश्रम कारावास व 13 हजार दंड की सजा..

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देवरी थानांतर्गत हुई थी वर्ष 2014 में घटना, सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील एड. पारधी ने की पैरवी..

प्रतिनिधि। 21 अगस्त
गोंदिया। निर्भया प्रकरण व समाज में दिनों-दिन बढ़ रहे बाल-लैंगिक आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने सरकार द्वारा इन घटनाओं की रोकथाम हेतु मजबूत कानून लागू कर दोषियों को सख्त सजा दिलाने फास्ट ट्रैक कोर्ट को शुरू किया गया है। इसी फास्ट ट्रैक कोर्ट के चलते निरंतर मामलों की सुनवाई, गवाहों व वकीलों की पैरवी के आधार पर आरोपियों को सजा व दंड सुनाया जा रहा है। ऐसे ही एक मामले पर आज 21 अगस्त को गोंदिया के मा. अतिरिक्त सह जिला सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश मा. सौ. शुभदा डी. तूळणकर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 साल सश्रम कारवास व 13 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई है।

जिस मामले में फैसला सुनाया गया है वो मामला वर्ष 2014 का बताया जा रहा है। आरोपी अमितकुमार सत्यनारायण कुशवाह उम्र करीब 25 वर्ष निवासी जिला फ़िरोदाबाद (यूपी) हाल मुकाम देवरी, जिला गोंदिया ने 24 दिसंबर 2014 को तकरीबन 3 बजे के दौरान पीड़िता फिर्यादि उम्र 17 वर्ष को उसके स्कूल जाकर तेरे भाई की तबियत खराब है उसे अस्पताल में ले जाया गया है ऐसा कहकर उसे अस्पताल लेकर आया था। इसके बाद पीड़िता के मा-बाप को विश्वास में लेकर इसे स्कूल छोड़कर आता हूं यह कहकर ले गया एवं स्कूल न ले जाते हुए पीड़िता को शेडेपार-देवरी जंगल मार्ग में ले जाकर उसके साथ जबर्दस्ती पूर्वक अतिप्रसंग किया।

पीड़िता फिर्यादि ने इस घटना पर 24 दिसंबर को देवरी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच तत्कालीन एसडीपीओ गजानन राजमाने एव सहायक पुलिस निरीक्षक शेडगे ने की थी। 9 अक्टूबर 2015 को ये प्रकरण मा. न्यायालय जिला सत्र न्यायालय गोंदिया में आरोपी के विरुद्ध दाखिल किया गया।

प्रकरण पर पीड़ित फिर्यादि व सरकारी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे विशेष सरकारी वकील श्रीकृष्णा डी. पारधी(फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध करने कुल 21 गवाहदार के बयान लिए। इनमें प्रमुख पीड़िता के बयान व चिकित्सकिय रिपोर्ट तथा सबूतों के आधार पर एव अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मा. कोर्ट ने ग्राहय मानते हुए तथा महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पर धारा 4 बाललैगिक अत्याचार कानून 2012 अंतर्गत 10 साल सश्रम कारावास व 10 साल दंड की सजा सुनाई। दंड ना भरने पर 1 माह अतिरिक सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 354 (अ) भादवि अंतर्गत 3 साल की सश्रम कारावास की सजा व 3 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई। दंड म भरने पर 1 माह अतिरिक्त सजा भी सुनाई।

इस मामले पर पुलिस अधीक्षक विश्व पानसरे, अपर पुलिस अधीक्षक अशोक बनकर के मार्गदर्शन में थानेदार रेवचंद सिंगनजुड़े की देखरेख में पैरवी अधिकारी ब्रिजलाल राऊत व मपुशि सौ. सुनीता लिल्हारे ने सहयोग किया।

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