गोंदिया: राष्ट्रीय लोक अदालत में 17,585 प्रकरणों का निपटारा, लोक अदालत में झलकी मानवीय संवेदनशीलता

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गोंदिया, (15सितंबर)| गोंदिया जिले में 12 सितंबर 2026 को आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित एवं पूर्व न्यायप्रविष्ट प्रकरणों के त्वरित, सामोपचारपूर्ण एवं समझौते के आधार पर निपटारे की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई। राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली तथा महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय, मुंबई के निर्देशानुसार आयोजित इस लोक अदालत का आयोजन प्रमुख जिला न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधि सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायालय, गोंदिया मा.श्री आर.जी वाघमारे के मार्गदर्शन में किया गया।

आयोजित लोक अदालत में न्यायालयीन प्रलंबित, पूर्व न्यायप्रविष्ट, विद्युत, बैंक एवं अन्य लोकोपयोगी सेवाओं से संबंधित समझौतायोग्य प्रकरणों का निपटारा किया गया।

लोक अदालत का उद्घाटन जिला न्यायाधीश-2 श्री एम. टी. असीम के शुभहस्ते हुआ। इस अवसर पर जिला न्यायाधीश-4 श्री ए. सी. खुराणा, तदर्थ जिला न्यायाधीश-1 श्री डी. व्ही. हरणे, मुख्य न्यायदंडाधिकारी श्री वाय. के. राउत, तृतीय सह दिवाणी न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर श्रीमती पी. एन. कोकाटे, चतुर्थ सह दिवाणी न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर श्रीमती ए. एम. कासिम, सह दिवाणी न्यायाधीश कनिष्ठ स्तर श्रीमती एस. ए. शेंडगे, तृतीय सह दिवाणी न्यायाधीश कनिष्ठ स्तर श्री व्ही. एच. शेंडे, गोंदिया जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एस. आर. बोरकर, न्यायिक कर्मचारीवृंद, पक्षकार एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।

लोक अदालत उद्घाटन के बाद मा. जिला न्यायाधीश-2 श्री एम. टी. असीम ने लोक अदालत के लाभ एवं महत्व पर मार्गदर्शन किया, जबकि श्री एन. के. वाळके तथा श्री एस. आर. बोरकर ने अधिकाधिक प्रकरणों के निपटारे का आह्वान किया।

लोक अदालत में कुल 77,131 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 17,585 प्रकरणों का निपटारा किया गया। इन प्रकरणों से कुल 8 करोड़ 57 लाख 81 हजार 817 रुपये की वसूली हुई। न्यायालयों में लंबित 5,563 प्रकरणों में से 1,124 प्रकरण समझौते के आधार पर निकाले गए और उनसे 5 करोड़ 78 लाख 59 हजार 482 रुपये की वसूली हुई। वहीं पूर्व न्यायप्रविष्ट 71,568 प्रकरणों में से 16,461 प्रकरणों का निपटारा किया गया तथा इनके माध्यम से 2 करोड़ 79 लाख 22 हजार 335 रुपये की वसूली हुई।

विशेष अभियान के तहत जिले के न्यायालयों में 228 फौजदारी प्रकरण रखे गए, जिनमें से 167 प्रकरणों का निपटारा किया गया। इससे संबंधित पक्षकारों को लंबे समय से चल रहे न्यायालयीन विवादों के कारण होने वाले मानसिक एवं आर्थिक तनाव से राहत मिली और अनेक पक्षकारों ने समाधान पर संतोष व्यक्त किया।

लोक अदालत की विशेष उपलब्धि यह रही कि महावितरण, विद्युत, पानी, टेलीफोन तथा बैंक रिकवरी से संबंधित पूर्व न्यायप्रविष्ट प्रकरणों में जिन पक्षकारों ने समझौते के अनुसार बकाया राशि संबंधित विभागों में जमा की, उनके प्रकरण स्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए। इससे संबंधित विभागों तथा बकायादारों दोनों का भविष्य का न्यायालयीन खर्च और मानसिक परेशानी बची।

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय-1, गोंदिया में लंबित दो मोटर दुर्घटना दावों का भी समझौते के आधार पर निपटारा हुआ। मुंबई उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति तथा गोंदिया जिले के पालक न्यायमूर्ति मा. श्री एम. डब्ल्यू. चांदवाणी के शुभहस्ते तथा जिला विधि सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश मा. श्री आर. जी. वाघमारे की उपस्थिति में इन मामलों में आवेदकों को नुकसानभरपाई के रूप में 25 लाख रुपये और 24 लाख 75 हजार रुपये, अर्थात कुल 49 लाख 75 हजार रुपये के दो धनादेश प्रदान किए गए। इस अवसर पर मा.जिला न्यायाधीश-2 श्री एम. टी. असीम, पैनल क्रमांक-2 के प्रमुख श्री ए. सी. खुराणा तथा जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री एन. के. वाळके उपस्थित रहे।

लोक अदालत में मानवीय संवेदनशीलता का भी उल्लेखनीय उदाहरण सामने आया। दुर्घटना प्राधिकरण में लंबित एक प्रकरण के वरिष्ठ नागरिक पक्षकार की उम्र अधिक होने के साथ दिव्यांगता के कारण वे चलने-फिरने में असमर्थ थे। ऐसे में पैनल क्रमांक-2 के अध्यक्ष श्री ए. सी. खुराणा-जिला न्यायाधीश-4 तथा सदस्य अधिवक्ता श्री चंदन वानखेडे स्वयं न्यायालय से उनके वाहन तक पहुंचे और वहीं उनसे बातचीत कर समझौते की प्रक्रिया पूरी की। परिणामस्वरूप प्रकरण का स्थायी रूप से निपटारा हो गया।

इसी तरह जिला विधि सेवा प्राधिकरण, गोंदिया में दाखिल वैवाहिक पूर्व न्यायप्रविष्ट प्रकरण में आवेदिका अपनी पुत्री के साथ ससुराल लौट गई और दोनों पक्षों की सहमति से मामला समझौते के आधार पर समाप्त हुआ। पैनल क्रमांक-2 में मुख्य न्यायदंडाधिकारी श्रीमती वाय. के. राउत के समक्ष वर्षों से लंबित दो दिवाणी दावों में भी समझौता कराया गया, जिसके बाद संबंधित पक्षकारों ने समाधान पर संतोष व्यक्त किया।

प्रकरणों के निपटारे में श्री ए. सी. खुराणा-जिला न्यायाधीश-4, श्री डी. व्ही. हरणे-तदर्थ जिला न्यायाधीश-1, श्रीमती वाय. के. राउत-मुख्य न्याय दंडाधिकारी, श्रीमती पी. एन. कोकाटे- तृतीय सह दिवाणी न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर,, जिला वकील संघ के पदाधिकारियों तथा पैनल पर कार्यरत अधिवक्ताओं श्री एड. चंदन वानखेडे, एड. श्रीमती रोशनी पटले, एड. पुनम रहांगडाले, एड. श्रीमती प्रज्ञा डोंगरे तथा एड.श्री एस. एम. चवरे ने सहयोग किया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिला न्यायालय, गोंदिया के प्रभारी प्रबंधक श्री ए. आर. कुकडे, अधीक्षक श्री एम. पी. पटले-जिला न्यायालय गोंदिया, जिला विधि सेवा प्राधिकरण के अधीक्षक श्री एन. पी. गोखले, श्री पी. एन. गजभिये, श्री संतोष कडव, श्री आर. ए. सोनकुसरे, कु. एस. एस. उके, श्री व्ही. व्ही. जाधव, श्री एन. सी. शहारे, श्री आर. के. पंधरे, शिपाई श्री रोहित मेंढे, श्री एन. बी. बहादुरे, बेलिफ व पैरा लीगल वॉलंटियर्स तथा अन्य न्यायालयीन कर्मचारियों ने अथक परिश्रम किया।

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