दो दिन की नवजात बच्ची जूझ रही थी ब्लड एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन’ से, अजय लधानी ने रक्तदूत बनकर नवजात को मौत के मुंह से बचाया..

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​गोंदिया: ‘रक्तदान महादान’ की उक्ति को चरितार्थ करते हुए गोंदिया के जागरूक रक्तदाताओं और डॉक्टरों ने एक बार फिर एक नवजात शिशु को जीवनदान देकर मानवता का परिचय दिया है। गोंदिया मेडिकल कॉलेज के शिशु विभाग में भर्ती मात्र दो दिन की बच्ची के लिए दुर्लभ ‘ओ-नेगेटिव’ (O-Negative) रक्त उपलब्ध कराकर उसे मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया गया।

​गंगझरी के जूनेवानी निवासी दिलेश्वरी इनवाते ने हाल ही में एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। जन्म के पश्चात बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे पीलिया (Jaundice) हो गया, जिसके चलते उसे गोंदिया मेडिकल कॉलेज के शिशु विभाग में भर्ती कराया गया। जाँच में पाया गया कि बच्ची के शरीर में रक्त की भारी कमी है और उसे तुरंत ‘एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन’ (रक्त बदलने) की प्रक्रिया की आवश्यकता है। चुनौती यह थी कि बच्ची का ब्लड ग्रुप ‘ओ-नेगेटिव’ था, जो बहुत दुर्लभ होता है और आपात स्थिति में इसका मिलना अत्यंत कठिन होता है।

​रक्तमित्रों की तत्परता और सफल समन्वय ​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के डॉक्टरों ने गोंदिया के ‘रक्तमित्र’ विनोद चांदवानी (गुड्डू) से संपर्क किया। सूचना मिलते ही गुड्डू चांदवानी ने अपनी सक्रिय रक्तदाता सूची खंगाली और बिना समय गंवाए शहर के नियमित रक्तदाता अजय लधानी से संपर्क साधा।

​जैसे ही अजय लधानी को सूचना मिली कि एक दो दिन की बच्ची की जान खतरे में है, वे अपने सभी काम छोड़कर तुरंत लोकमान्य ब्लड बैंक पहुँचे और अपना दुर्लभ ‘ओ-नेगेटिव’ रक्त दान किया। उनकी इस तत्परता और निस्वार्थ भावना के कारण समय रहते नवजात का रक्त बदला जा सका, जिससे बच्ची की जान बच पाई।

इस मानवीय कार्य के लिए अजय लधानी को रक्तमित्र विनोद चांदवानी (गुड्डू), नितिन रायकवार और नितिन पंधरे द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनवाते परिवार ने संकट की इस घड़ी में देवदूत बनकर आए रक्तदाता अजय लधानी और समन्वय करने वाले गुड्डू चांदवानी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

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