गोंदिया: ग्रामीणों ने रुकवाई लौह अयस्क के लिए हो रही वनभूमि से पेड़ों की कटाई, लोहखदान का दर्ज किया विरोध..

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प्रतिनिधि। 9 जनवरी
गोंदिया। ग्राम मानेगांव में मवेशियों के चरागाह और इमारती लकड़ी के लिए आरक्षित वन भूमि पर वन विभाग द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही थी। मामला ग्रामीणों के संज्ञान में आते ही ग्रामीण एकजुट हो गये और पेड़ों की अवैध कटाई का विरोध कर पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई।
ग्राम मानेगांव के समूह क्र. 553 पर कुल 17.04 हे.आर वन भूमि मवेशीयों के चरागाह और इमारती लकड़ी के लिए आरक्षित है। वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत के माध्यम से लौह अयस्क खनन के लिए निजी कंपनी को ग्राम पंचायत के माध्यम से अनुमति दी जाये इस हेतु 17/05/2022 को ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को खारिज कर लौह अयस्क खनन के लिए जमीन निको जायसवाल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नागपुर को न दी जाये ये प्रस्ताव पारित कर विरोध दर्शाया था।
गोंदिया जिले में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली “सेवा संस्था” (सस्टेनिंग एनवायरनमेंट एंड वाइल्डलाइफ असेंबलेज) ने भी ग्रामीणों का समर्थन करते हुए लौह अयस्क खनन के लिए निजी कंपनी को भूखंड नहीं दिए जाने विभिन्न सरकारी विभागों से पत्राचार किया था.
लेकिन सोमवार दिनांक 09/01/2024 को संज्ञान में आया कि उक्त वन भूमि पर पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है। इससे ग्रामीणों ने अनुमान लगाया कि वन विभाग उक्त वन भूखंड पर लगे पेड़ों को काटकर इस जमीन को निको जायसवाल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नागपुर को लौह अयस्क खनन के लिए उपलब्ध कराना चाह रहा है.
गौरतलब है कि यह स्थान पर्यावरण की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यह स्थान विभिन्न प्रकार के दुर्लभ वन्य जीवों का निवास स्थल है। इस वन भूमि के कारण ग्रामीणों को गांव के तालाब में कृषि के लिए उपयोगी पानी उपलब्ध होता है।
जिलाधिकारी गोंदिया को निवेदन पत्र दिया गया है कि यदि उक्त वन भूखंड पर पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो सभी ग्रामीण एक साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रकाश मेश्राम सरपंच ग्रा.पं. मानेगाव, सिमाबाई बोपचे ग्रा. प. उपसरपंच मानेगाव, मीनाबाई मरसकोल्हे अध्यक्ष वन व्यवस्थापन समिती, हितेश मेश्राम उपाध्यक्ष वन व्यवस्थापन समिती, यशवंतराव राहंगडाले, ललिताबाई नागोसे, ग्यारेस फुंडे, ज्योती मेश्राम, ममता मेश्राम, छोटेलाल फुंडे, हिरालाल बोपचे, देवचंद फुंडे, मोरेश्वर बोपचे, निलेश मरसकोल्हे, परमानंद मेश्राम, जीवनलाल बोपचे, रुपचंद फुंडे, घनश्याम पारधी, ठामेश्वर बोपचे, ईश्वरदार मानकर, गुडेश बिसेन, धर्मेद्र फुंडे, जितेंद्र बोपचे व अन्य ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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