गोंदिया न्यायालय का फैसला: दुष्कर्म के आरोपी को 23 साल की कठोर सजा…

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प्रतिनिधि। 13 दिसंबर
गोंदिया। 17 वर्षीय पीड़ित नाबालिग से रिश्ते में मौसा आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती कर लैगिंक अत्याचार (दुष्कर्म) करने के मामले पर आज जिला व विशेष सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को 23 साल की सश्रम कारावास व 22 हजार 500 रुपये दंड की सजा सुनाई।
ये वारदात वर्ष 2019 की है। पीड़ित लड़की (उम्र 17 साल) की माँ की मृत्यु के बाद वो अपने पिता व सौतेली माँ के साथ रहती थी। सितंबर 2019 में वो मेहमान के तौर पर अपने मौसा के घर गई थी। मौसा घर में अकेला था, तभी उसने अकेलेपन का फायदा उठाकर पीड़ित के साथ जबरदस्ती की और लैंगिक अत्याचार किया।
आरोपी मौसा अशोक ऋषी मेंढे उम्र 40 साल ने किसी को न बताने की धमकी देकर तथा जान से मारने की धमकी देकर बार बार लैंगिक अत्याचार किया। लड़की ने डर के कारण ये बात किसी की नही बताई। पर जब उसने ये बात सौतेली माँ को बताई तो उसने नजर अंदाज कर दिया।
पीड़ित जब घर वापस आयी तो वो तीन चार माह की गर्भवती होने घर के लोगो को संज्ञान में आया। तब पीड़िता ने सारी घटना अपने पिता को बताई। घटना की गंभीरता को देख पिता ने आरोपी अशोक मेंढे के खिलाफ पुलिस स्टेशन अर्जुनी मोरगाँव में अप्रैल 2020 में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने फिर्यादि की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर उस दौरान जांच अधिकारी पीडी भूते सहायक पुलिस निरीक्षक ने जांच कर न्यायालय में आरोपी विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की।
 उक्त प्रकरण में आरोपी विरुद्ध आरोप सिद्ध करने सरकार/पीड़ित की ओर से सरकारी वकील कृष्णा डी. पारधी ने कोर्ट के समक्ष कुल 13 सबूत प्रस्तुत किये। व बचाव पक्ष के 2 गवाहदारों की उलट जांच की थी।
आरोपी के वकील व सरकारी वकील के बीच हुए युक्तीवाद के बाद मा. न्यायालय श्री. ए.टी. वानखेडे, प्रमुख जिल्हा व विशेष सत्र न्यायाधीश, गोंदिया जि. गोंदिया ने आरोपी विरूध्द सरकारी पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूत, न्यायवैद्यक तपासणी अहवाल, डी.एन.ए. रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट सभी को ग्राहय रखकर आरोपी अशोक ऋषी मेंढे
उम्र ४० वर्षे, निवासी पिपंळगाव , ता अर्जुनी/ मोर, जिला गोंदिया को दोषी मानते हुए यौन शोषण से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 6 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000/- रुपये का जुर्माना और जुर्माना न देने पर 4 महीने का अतिरिक्त कारावास।
इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)एन)(एफ) के तहत 10 साल का कठोर कारावास और 10,000/- रुपये का जुर्माना और जुर्माना नहीं देने पर 4 महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनायी।
साथ ही भारतीय दण्ड विधान की धारा 506 के तहत 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2,500 रूपये का अर्थदण्ड सुनाया। साथ ही उक्त जुर्माने में से 20,000/- रूपये की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया है.
उक्त मामले में जिला पुलिस अधीक्षक निखिल पिंगले के मार्गदर्शन में पुलिस निरीक्षक विलास नाले के नेतृत्व में पैरवी कर्मचारी पुलिस हवलदार अंबुले, ब.नं. 1410, थाना अर्जुनी/मोरगांव ने उत्कृष्ट कार्य किया।

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