सीएम से लेकर मंत्रियों तक की फौज उतरी, फिर भी नहीं चला जादू; कांग्रेस के वंजारी ने बचाया अपना गढ़!

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पहले चरण में कोहले की बढ़त, बाद की मतगणना में वंजारी की जोरदार वापसी; 67,231 मत लेकर बने विजेता, भाजपा-महायुति के खेमे में सियासी मंथन

नागपुर। नागपुर विभाग स्नातक विधान परिषद चुनाव के नतीजे ने महाराष्ट्र की सियासत में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, राज्यसभा सांसद और मंत्रियों तक की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा-महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को जीत नहीं मिल सकी। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने रोमांचक मुकाबले में बाजी मारते हुए नागपुर स्नातक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। लंबी मतगणना और मतों की बाद फेरी के बाद घोषित इस परिणाम ने भाजपा खेमे को झटका दिया, वहीं कांग्रेस के लिए विदर्भ में इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

चुनाव की मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा-महायुति उम्मीदवार सुधाकर कोहले बढ़त बनाए हुए थे। इससे भाजपा खेमे में जीत की उम्मीदें मजबूत दिखाई दे रही थीं। लेकिन मतगणना आगे बढ़ने के साथ मुकाबले का रुख बदलता गया। पहली पसंद के मतों की गिनती के बाद भी जब कोई उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा हासिल नहीं कर सका, तो दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी की प्रक्रिया अपनाई गई। अंततः सभी संबंधित फेरियों के मतों को मिलाकर अभिजीत वंजारी ने सर्वाधिक मत हासिल किए और उन्हें विजयी घोषित किया गया।

जीत का कोटा 75,438, फिर भी कोई उम्मीदवार नहीं पहुंचा आंकड़े तक

इस चुनाव में जीत के लिए निर्धारित कोटा 75 हजार 438 मतों का था। पहली पसंद के मतों के पहले दो चरणों में कोई भी उम्मीदवार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। चुनाव प्रक्रिया के नियमानुसार इसके बाद दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी कराई गई।

मतगणना के पहले दो चरणों में कुल 1 लाख 65 हजार 906 मतों की गिनती की गई। इनमें से 15 हजार 32 मत अवैध पाए गए, जबकि 1 लाख 50 हजार 874 मत वैध घोषित किए गए। वैध मतों की गणना के बावजूद किसी भी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा नहीं मिलने से मुकाबला आगे बढ़ा और दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी निर्णायक साबित हुई।

दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी में वंजारी ने मारी बाजी

दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी में भी कोई उम्मीदवार निर्धारित 75,438 मतों का कोटा पूरा नहीं कर सका। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के अनुसार पहली और दूसरी पसंद के मतों की बाद फेरी को मिलाकर सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने 67,231 मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा-महायुति के सुधाकर कोहले को 63,960 मत मिले। इस तरह वंजारी ने कोहले को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।

मतगणना के शुरुआती रुझानों में कोहले की बढ़त ने भाजपा खेमे में उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन अंतिम परिणाम ने पूरा राजनीतिक समीकरण बदल दिया। इस चुनाव ने दिखाया कि शुरुआती बढ़त अंतिम जीत की गारंटी नहीं होती और मतगणना की पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वास्तविक तस्वीर सामने आती है।

मुख्यमंत्री से मंत्रियों तक की फौज, फिर भी कांग्रेस को नहीं रोक सकी भाजपा

नागपुर स्नातक सीट का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपने करीबी नेताओं को मैदान में सक्रिय किया था। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, एमएलसी परिणय फुके, मंत्री पंकज भोयर सहित भाजपा के विधायक, शिवसेना के नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता चुनावी मोर्चे पर जुटे हुए थे।

गोंदिया-भंडारा क्षेत्र में भी भाजपा-महायुति के पक्ष में राजनीतिक ताकत झोंकी गई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और राज्यसभा सांसद राजेंद्र जैन चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहे। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को रोकने में भाजपा-महायुति सफल नहीं हो सकी। यही वजह है कि चुनाव परिणाम को केवल एक सीट की जीत-हार के बजाय विदर्भ की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई के नतीजे के रूप में भी देखा जा रहा है।

विदर्भ में कांग्रेस के लिए संजीवनी, भाजपा के लिए आत्ममंथन का समय

अभिजीत वंजारी की जीत को विदर्भ में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा-महायुति की मजबूत राजनीतिक घेराबंदी के बावजूद अपनी सीट बरकरार रखी। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ने की उम्मीद है और पार्टी को आगामी राजनीतिक संघर्षों के लिए नई ऊर्जा मिल सकती है।

दूसरी ओर, भाजपा-महायुति के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन सकता है। मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के प्रचार तथा संगठनात्मक ताकत के बावजूद उम्मीदवार की हार ने चुनावी रणनीति और मतदाताओं के रुझान पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, केवल इस परिणाम के आधार पर पूरे राज्य के मतदाताओं की भावना का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन नागपुर स्नातक सीट का फैसला निश्चित रूप से राजनीतिक विश्लेषण का विषय बनेगा।

शिक्षित युवाओं के भरोसे की परीक्षा में कांग्रेस को सफलता?

इस चुनाव को स्नातक मतदाताओं, शिक्षित युवाओं और बेरोजगार वर्ग के नजरिये से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोजगार, भविष्य की संभावनाओं और शिक्षित युवाओं की अपेक्षाओं जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श में प्रमुख रहे हैं। वंजारी की जीत को इन मतदाताओं के रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि मतगणना के आंकड़े अपने आप में किसी खास मुद्दे को निर्णायक कारण साबित नहीं करते।

नागपुर विभाग स्नातक सीट का यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहेगा कि शुरुआती बढ़त के बावजूद सुधाकर कोहले जीत हासिल नहीं कर सके, जबकि अभिजीत वंजारी ने मतगणना की अंतिम प्रक्रिया में सबसे अधिक मत प्राप्त कर अपनी सीट बचा ली। भाजपा-महायुति की पूरी राजनीतिक ताकत के सामने कांग्रेस की यह जीत विदर्भ की राजनीति में एक अहम संदेश के रूप में देखी जा रही है।

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