कोहले के लिए विनोद अग्रवाल तो वंजारी के लिए गोपालदास अग्रवाल मैदान में-
गोंदिया में भी ‘हम किसी से कम नहीं’ की सियासी रस्साकशी
गोंदिया। नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव का मतदान 23 अक्टूबर को होने जा रहा है और इसके ठीक पहले कांग्रेस आघाड़ी तथा भाजपा महायुति के बीच सियासी रस्साकशी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव भले ही स्नातक मतदाताओं का हो, लेकिन मैदान में उतरे दिग्गजों को देखकर मुकाबला किसी बड़े विधानसभा चुनाव से कम नजर नहीं आ रहा। भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के लिए विधायक विनोद अग्रवाल ने मोर्चा संभाल लिया है, तो कांग्रेस उम्मीदवार एवं वर्तमान विधायक एड. अभिजीत वंजारी के लिए पूर्व विधायक गोपालदास अग्रवाल स्वयं मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में गोंदिया की सियासी जमीन पर भी मुकाबला दिलचस्प हो गया है कि आखिर किसके प्रचार का असर मतपेटी में दिखाई देता है।
इस चुनाव की खासियत यह है कि यह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव है, यानी यहां मतदाता सामान्य राजनीतिक समीकरणों से कुछ अलग सोच-विचार के साथ मतदान करता है। यही वजह है कि इस सीट पर हर वोट को साधने के लिए दोनों खेमों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने इस बार पूर्व विधायक अनिल सोले को टिकट नहीं दिया। टिकट को लेकर नाराजगी इतनी गहरी थी कि अंतिम समय तक सोले ने नामांकन वापस नहीं लिया और स्थिति संभालने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री को नागपुर आकर उन्हें मनाना पड़ा। इसके बाद कहीं जाकर मामला शांत हुआ। अब भाजपा ने सुधाकर कोहले को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मंत्री से लेकर पूर्व मंत्री और विधायक से लेकर पूर्व विधायक तक चुनावी मोर्चे पर सक्रिय हैं और भाजपा किसी भी कीमत पर यह सीट अपने पाले में करना चाहती है।
गोंदिया में भाजपा विधायक विनोद अग्रवाल ने सुधाकर कोहले के समर्थन में धुआंधार प्रचार करते हुए अपनी पूरी राजनीतिक ताकत लगा दी है। मतदाताओं तक पहुंचने से लेकर उन्हें अपने पक्ष में लामबंद करने तक भाजपा की टीम लगातार सक्रिय है। वहीं महायुति की ओर से सांसद राजेंद्र जैन, विधायक राजकुमार बड़ोले, विजय रहांगडाले और संजय पुराम भी अपनी-अपनी भूमिका में पूरी फील्डिंग संभाले हुए हैं। साफ है कि भाजपा के लिए यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत दिखाने की परीक्षा भी बन चुका है।
दूसरी ओर कांग्रेस भी इस सीट को किसी भी हालत में हाथ से जाने देना नहीं चाहती। वर्तमान विधायक एड. अभिजीत वंजारी कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पूरे लाव-लश्कर के साथ मैदान में डटे हैं। वंजारी मतदाताओं के बीच पहुंचकर अपने पिछले कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड सामने रख रहे हैं और आगामी कार्यकाल में क्या-क्या करना है, इसका रोडमैप भी बता रहे हैं। यानी एक तरफ भाजपा ‘बदलाव और जीत’ का दावा कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस अपने मौजूदा विधायक के कामकाज को आधार बनाकर मतदाताओं से दोबारा भरोसा मांग रही है।
अभिजीत वंजारी की जीत के लिए कांग्रेस ने भी अपने दिग्गजों को मैदान में उतार दिया है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले, सांसद प्रशांत पडोले, सांसद किरसान, पूर्व विधायक गोपालदास अग्रवाल, सुनील केदार, विकास ठाकरे, राऊत, दिलीप बंसोड़ सहित कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे चुनावी मोर्चे पर सक्रिय हैं। गोंदिया में तो 27 वर्षों तक विधायक रहे मंजे हुए राजनीतिज्ञ गोपालदास अग्रवाल ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। अब उनकी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक अनुभव वंजारी के पक्ष में कितनी वोटों में तब्दील होता है, यह देखना भी अपने आप में दिलचस्प होगा।
गोंदिया में कांग्रेस की ओर से प्रफुल्ल अग्रवाल, जिलाध्यक्ष अमर वरहाड़े और पूरी टीम स्नातक मतदाताओं के बीच सक्रिय है। दूसरी तरफ भाजपा-महायुति की टीम भी अपने उम्मीदवार को अधिकतम बढ़त दिलाने के लिए पूरी ताकत से जुटी है। लिहाजा गोंदिया में मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों राजनीतिक खेमों की प्रतिष्ठा के बीच भी दिखाई दे रहा है। ‘हम किसी से कम नहीं’ की इस होड़ ने चुनावी माहौल को खासा रोमांचक बना दिया है।
अब असली सवाल यह है कि प्रचार के दौरान लगाए गए राजनीतिक दांव और किए गए दावे कितने वोटों में बदलते हैं। किसके साथ स्नातक मतदाता खड़ा होता है और किसकी रणनीति मतपेटी तक पहुंचकर कामयाब होती है, इसका फैसला 23 अक्टूबर के मतदान के बाद होगा। फिलहाल दोनों खेमे अपनी-अपनी जीत का गणित बैठा रहे हैं, लेकिन असली हिसाब 27 अक्टूबर को पिटारा खुलने के बाद ही सामने आएगा। तब पता चलेगा कि चुनावी मैदान में किसका दावा भारी पड़ा और कौन वास्तव में कितने पानी में था। फिलहाल प्रशासन ने मतदान को लेकर व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है और पूरे चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं।
