GONDIA: विदर्भ के पहले ‘पुस्तकों के गांव’ का नवेगांव बांध में भव्य लोकार्पण

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झाड़ीबोली साहित्य सम्मेलन को हर वर्ष 25 लाख रुपये का अनुदान; मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत की घोषणा

गोंदिया, 22 अगस्त। मराठी भाषा के विकास, उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और गांव-गांव में वाचन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में गोंदिया जिले ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध नवेगांव बांध को विदर्भ का पहला ‘पुस्तकों का गांव’ बनाया गया है। राज्य के मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने शनिवार को यहां ‘पुस्तकों के गांव’ के प्रथम दालन का भव्य लोकार्पण किया।

इस अवसर पर मंत्री उदय सामंत ने झाड़ीबोली साहित्य सम्मेलन के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये का अनुदान देने की महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद उसके विकास को और व्यापक गति देने के लिए गांव स्तर पर वाचन संस्कृति का विस्तार जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा ‘पुस्तकों का गांव’ की संकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

सामंत ने कहा कि गोंदिया जिला वनसंपदा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। ज्येष्ठ पक्षीतज्ज्ञ मारुति चितमपल्ली के पदस्पर्श से पावन हुई इस भूमि पर ‘पुस्तकों का गांव’ की शुरुआत होना विशेष महत्व रखता है। नवेगांव बांध की प्राकृतिक संपदा और पर्यटन क्षमता के साथ यहां विकसित होने वाली वाचन संस्कृति क्षेत्र को एक नई पहचान प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि मराठी भाषा की समृद्धि केवल उसके वर्तमान साहित्य में नहीं, बल्कि उसकी संत परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और विशाल ग्रंथसंपदा में भी निहित है। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के साहित्यिक एवं ऐतिहासिक योगदान ने मराठी भाषा को समृद्ध बनाया। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि मराठी का पहला राज्यव्यवहार कोश छत्रपति शिवाजी महाराज ने तैयार कराया था।

मराठी के साथ-साथ महाराष्ट्र की विभिन्न बोलीभाषाओं के संरक्षण और विकास पर जोर देते हुए सामंत ने कहा कि ‘पुस्तकों का गांव’ की संकल्पना बोलीभाषाओं और स्थानीय साहित्य को भी मंच प्रदान करने वाली है। महाराष्ट्र की सीमा पर ‘चांदा से बांदा’ की संकल्पना के अनुरूप राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ‘पुस्तकों के गांव’ और ‘कविता के गांव’ विकसित करने का सरकार का मानस है।

मंत्री सामंत ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मराठी माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर विद्यार्थी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में उद्योग एवं व्यवसाय के लिए आने वाले अन्य राज्यों के नागरिक यदि मराठी भाषा सीखते हैं, तो इससे उनके व्यक्तित्व और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा अब तक 1 लाख 67 हजार हिंदी भाषियों को मराठी भाषा सिखाई गई है, यह जानकारी भी उन्होंने दी।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त कर अपनी मिट्टी और समाज से जुड़े रहने तथा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है।

मंत्री ने बताया कि हाल ही में भंडारा जिले के दौरे के दौरान गणेशपुर को ‘पुस्तकों का गांव’ और लाखनी को ‘कविता का गांव’ घोषित किया गया है। उन्होंने झाड़ीपट्टी क्षेत्र के साहित्य के अध्ययन में स्वयं भी सहभागी बनने की इच्छा व्यक्त की।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रा. डॉ. शरद मेश्राम ने किया, जबकि संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. लक्ष्मीकांत कापगते ने किया। नवेगांव बांध में ‘पुस्तकों के गांव’ की शुरुआत को विदर्भ में वाचन संस्कृति, स्थानीय साहित्य और बोलीभाषाओं के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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