9 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट का कड़ा फैसला, नाबालिग से छेड़छाड़ व धमकी के दूसरे मामले में भी दोषी करार
गोंदिया, 23 अक्टूबर। प्रतापगढ़ (ता. अर्जुनी मोरगांव, जि. गोंदिया) निवासी उमेश राजू रामटेके (36) को दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में दोषी ठहराते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, DJ-3 ने सजा सुनाई है। इनमें सबसे गंभीर मामले में आरोपी को अपनी ही 9 वर्षीय बेटी के साथ यौन अत्याचार के अपराध में POCSO Act की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, दूसरे मामले में 17 वर्ष 5 माह की नाबालिग के घर में अनधिकृत प्रवेश कर उसके साथ अश्लील हरकत, शारीरिक सुख की मांग, हाथ पकड़कर विनयभंग करने और धमकी देने के मामले में भी अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में सश्रम कारावास से दंडित किया है। दोनों मामलों का फैसला 23 अक्टूबर 2026 को आया।
पहले मामले में केशोरी पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 57/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपनी ही 9 वर्षीय बेटी के साथ यौन अत्याचार किया था। इसके अलावा अपनी मां के साथ जबरदस्ती यौन अत्याचार करने तथा उसे और बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए केशोरी पुलिस ने जांच कर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक संदीप भोसले ने की। सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता श्री सतीश घोडे एवं श्री चुटे ने पैरवी की।
न्यायालय ने आरोपी उमेश राजू रामटेके को BNS की धारा 64(2)(f) के तहत 15 वर्ष सश्रम कारावास एवं 3 हजार रुपए जुर्माना, POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास एवं 5 हजार रुपए जुर्माना, तथा BNS की धारा 351(1) के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
दूसरे मामले में भी आरोपी की आपराधिक हरकतों पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अपराध क्रमांक 33/2024 के इस मामले में 12 अप्रैल 2024 की रात प्रतापगढ़ में 17 वर्ष 5 माह की पीड़िता अपने घर में सो रही थी। आरोप है कि उमेश रामटेके ने घर में अनधिकृत प्रवेश किया और पीड़िता के साथ अश्लील व्यवहार करते हुए शारीरिक सुख की मांग की। इसके बाद उसका हाथ पकड़कर विनयभंग किया तथा धमकी भी दी। इस मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक अभिजीत जोगदंड ने की। सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता श्री सतीश घोडे एवं श्री चुटे ने न्यायालय में पक्ष रखा।
इस मामले में न्यायालय ने आरोपी को भादंवि की धारा 450 के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास, धारा 506 के तहत 3 वर्ष, POCSO अधिनियम की धारा 8 के तहत 3 वर्ष तथा धारा 12 के तहत 2 वर्ष सश्रम कारावास एवं संबंधित दंड की सजा सुनाई।
दो अलग-अलग मामलों में एक ही दिन आरोपी को दोषी ठहराकर सजा सुनाए जाने से केशोरी पुलिस की जांच और न्यायालयीन पैरवी की भी चर्चा हो रही है। दोनों मामलों में केशोरी पुलिस थाने की टीम ने जांच की थी, जबकि न्यायालयीन कार्यवाही के लिए कोर्ट पैरवी अधिकारी महिला पुलिस कांस्टेबल पुनम ठाकरे ने जिम्मेदारी संभाली।
पुलिस की इस कार्रवाई और उत्कृष्ट जांच के लिए गोंदिया के पुलिस अधीक्षक श्री गोरख भामरे, अपर पुलिस अधीक्षक श्री अभय डोंगरे, देवरी के उपविभागीय पुलिस अधिकारी राजेश तटकरे, केशोरी पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी तथा सहायक पुलिस निरीक्षक श्री चेतन ढेकणे ने संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की है। दो अलग-अलग मामलों में आरोपी को एक ही दिन मिली सजा ने प्रतापगढ़ सहित पूरे क्षेत्र का ध्यान इस मामले की ओर खींचा है।
