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गोंदिया :(03 सितंबर) भूमि अधिग्रहण के बढ़े हुए मुआवजे को लेकर चल रहे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। न्यायालय के आदेश के बाद गोंदिया के उपविभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय में कुर्की की कार्रवाई की गई। न्यायालय के कर्मचारियों ने शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं की मौजूदगी में कार्यालय पहुंचकर फर्नीचर एवं अन्य शासकीय सामग्री को जब्त किया। इस कार्रवाई में उपविभागीय अधिकारी की कुर्सी भी कुर्क किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, शासकीय वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी कुर्की फिलहाल नहीं हो सकी।
मामला गोंदिया शहर के क्रीड़ा संकुल परिसर से जुड़ा है। जानकारी के तहत यहां राजू नागवंशी के स्वामित्व वाली करीब 11 आर यानी लगभग 11 गुंठे जमीन को वर्ष 2009 में शासन द्वारा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित किया गया था। भूमि अधिग्रहण के बाद शासन की ओर से मुआवजे की राशि प्रदान की गई, लेकिन नागवंशी का दावा था कि उन्हें नियमानुसार मिलने वाला बढ़ा हुआ मुआवजा अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।
बढ़े हुए मुआवजे की मांग को लेकर नागवंशी ने प्रशासन के समक्ष लगातार पत्राचार एवं पीछा किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई दिवाणी न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) के न्यायालय में हुई। न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित बकाया राशि की वसूली के लिए उपविभागीय अधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसी आदेश के तहत 3 सितंबर को न्यायालय के कर्मचारी शिकायतकर्ता राजू नागवंशी के अधिवक्ताओं के साथ उपविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचे और कुर्की की कार्रवाई शुरू की।कार्यालय में मौजूद विभिन्न सामग्री को जब्त किया गया। बताया गया कि कार्रवाई के दायरे में उपविभागीय अधिकारी की कुर्सी सहित कार्यालयीन सामग्री भी शामिल थी।
हालांकि कार्रवाई के दौरान उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं थे। वे जिलाधिकारी कार्यालय गए हुए थे। इसके चलते कार्यालय की सामग्री तो कुर्क कर ली गई, लेकिन शासकीय वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे जब्त नहीं किया जा सका। शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं के अनुसार, वाहन जब भी उपलब्ध होगा, न्यायालय के आदेशानुसार उसकी भी कुर्की की जाएगी।
भूमि अधिग्रहण के बढ़े हुए मुआवजे की वसूली के लिए शासकीय कार्यालय की सामग्री और अधिकारी की कुर्सी तक कुर्क किए जाने की कार्रवाई सामने आने से गोंदिया शहर में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। न्यायालय के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है।
अब देखना यह होगा कि न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और भूमि अधिग्रहण के बढ़े हुए मुआवजे को लेकर चल रहा यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
