भाजपा के अभेद्य किले पर कांग्रेस ने ठोंक दी कील, टूट गया 58 सालों का अटूट रिश्ता

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ओबीसी कार्ड के खेल में महाविकास आघाडी के एड. अभिजीत वंजारी विजयी, भाजपा के संदीप जोशी 18 हजार 910 मतों से पराजित

हकीक़त न्यूज।

गोंदिया। भारतीय जनता पार्टी की परंपरागत सीट माने जाने वाली महाराष्ट्र विधानपरिषद की नागपुर विभाग स्नातक मतदार संघ की सीट पर इस बार कांग्रेस ने राकांपा और शिवसेना के साथ मिलकर भाजपा के अभेद्य किले पर कील ठोक दी है। पिछले 58 वर्षों से इस सीट से चुनकर भाजपा नेताओं ने जनप्रतिनिधित्व कर उच्च सदन का रास्ता परमानेंट बनाया हुआ था। पर इस बार इस मजबूत किले को ढाह दिया गया।

   महाविकास आघाडी के विजयी उम्मीदवार एड. अभिजीत वंजारी ने इस स्नातक चुनाव की मतगणना में पहले पसंद के तौर पर 17वीं फेरी के एलिमिनेशन मतगणना में 61 हजार 701 मत प्राप्त किया। वही भाजपा के उम्मीदवार संदीप जोशी ने 42 हजार 791 मत प्राप्त किया। इस तरह वंजारी 18 हजार 910 मतों से विजयी रहें।

पूर्व मुख्यमंत्री फड़नवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी संभाल रहे थे चुनावी धुरा…

   गौरतलब है कि इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार रहे संदीप जोशी नागपुर के मेयर है वही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बेहद करीबी मित्र रहे है। इसी मित्रता के चलते इस सीट से विधायक रहे नितिन गडकरी खेमे के अनिल सोले को हटाकर जोशी को टिकट दी गई। जोशी के खड़े होने से इस सीट को वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था। खुद फड़नवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी चुनाव की बागडोर संभाल रहे थे।

इस सीट पर ये रहे भाजपा के दिग्गज नेता

भाजपा की 58 सालों से परंपरागत या परमानेंट सीट माने जाने वाली इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधरराव फड़नवीस 2 बार विधायक रहे। पूर्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 3 बार विधायक रहे। साथ ही अनिल सोले ने जनप्रतिनिधित्व कर उच्च सदन में स्थान प्राप्त किया।

इस चुनाव में ओबीसी कार्ड चला

इस चुनाव को संदीप जोशी के विरुद्ध देखा जा रहा था। कहा जाता है कि नागपुर के महापौर संदीप जोशी और आयुक्त तुकाराम मुंढे के बीच जो नोकझोक चली, तथा उनके तबादले पर कांग्रेस मुंढे के समर्थन में आयी थी। जोशी को इस चुनाव में पराजित करने हेतु ही महाविकास आघाडी ने मिलकर भाजपा के गढ़ को तोड़ने का सफल प्रयास किया। इसमें ओबीसी मतदाताओं का रुझान एड. अभिजीत वंजारी के पक्ष में चला। स्नातक मतदाता उनके लिए कुछ नया चाहते है जो वंजारी के आश्वासनो पर विश्वास कर दिखाई दिया। उनका मानना था कि भाजपा ने इतने सालों में उच्च शिक्षित मतदाताओं के मतों से जनप्रतिनिधित्व किया पर उनके लिए विदर्भ में कोई विकल्प तैयार नही किये।
   एड. अभिजीत वंजारी को 17वी फेरी के एलिमिनेशन मतगणना के बाद विभागीय आयुक्त व चुनाव निर्णय अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने विजयी घोषित किया। इस दौरान पशु सवंर्धन दुग्ध व्यवसाय व मत्स्य सवंर्धन तथा क्रीड़ा मंत्री सुनील केदार, सांसद कृपाल तुमाने, विधायक विकास ठाकरे, विधायक राजू पारवे, पूर्व मंत्री राजेन्द्र मूलक उपस्थित थे। बता दे कि पहली पसंद के कुल मतों की गणना का कोटा पूर्ण ना होने पर एकल संक्रमन प्राधान्यक्रम अनुसार 17वी फेरी (एलिमिनेशन) मतगणना पूर्ण की गई, जिसमें 30 घण्टों की लंबी फेहरिस्त के बाद वंजारी विजयी हुए।

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